सेमीफाइनल में 350 से कम में गुजारा नहीं होगा!

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टीम इंडिया (team india) जीत के रथ पर सवार वर्ल्ड कप (world cup) में अभी तक अपराजेय है| लेकिन जहां एक ओर बड़ी टीमें 350 + की मानसिकता के साथ उतर रही है, वहीँ भारतीय टीम 250+ के लिए संघर्ष करती दिख रही है | टी-20 के चलते 50 ओवर के खेल में पहले जहां दूसरी टीमें तेज़ शुरुआत ओर विकेट बचाने की नीति से खेल रही है वहीँ भारतीय ओपनर पहले दस ओवर कुछ ज्यादा ही संभलकर खेल रहे है| यहाँ तक तो ठीक था लेकिन जब धीमी शुरुआत के बाद टॉप आर्डर ध्वस्त होता है तो मुश्किल और भी बढ़ जाती है| ज्यादा डिफेंसिव होने से बॉलर्स और भी धारदार महसुस होने लगते है| ऐसे में मिडिल आर्डर पर दबाव और बढ़ जाता है| फिर टीम इंडिया का नंबर चार का मसला अभी भी नहीं सुलझा है, क्योंकि शंकर मोह विराट छोड़ नहीं पा रहे है| उनसे कही काबिल पंत और कार्तिक डगआउट की शोभा बढ़ा रहे है|

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विजय शंकर (vijay shankar ) तो शायद टीम की पराजय के लिए ही बने हुए है| छोटे से करियर में वे कई बार इसका उदाहरण दें चुके है| वैसे दस से भी कम मैचों के अनुभव के साथ उन्हें वर्ल्ड कप क्यों भेजा गया यह भी सवाल है | BCCI को उनमे थ्री डायमेंशन प्लेयर नजर आया, जबकि उनकी एक भी डायमेंशन सही डायरेक्शन में नहीं है | जडेजा कई बार टीम के लिए ऑल राउंडर की भूमिका अदा कर चुके है| अपनी गेंदबाजी के दम पर वे टीम को कई जीत भी दिलवा चुके है| ऐसे में शंकर कब तक टीम में बने रहेंगे फ़िलहाल कहना मुश्किल है |अब जिक्र करें जरा धोनी का | धोनी की महानता और एक क्रिकेटर के तौर पर उनके कद का जिक्र करना फ़िलहाल बेमानी है | लेकिन इस वर्ल्ड कप धोनी की धीमी बल्लेबाजी टीम के गले की हड्डी बन गई है|

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धोनी (dhoni) क्या चाहते है कभी-कभी यह समझना ही मुश्किल हो जाता है| विकेट बचाना, टीम को आगे ले जाना, नए खिलाड़ियों को खिलाना , यहाँ तक तो ठीक है लेकिन अंतिम ओवर्स में भी बल्ला न घुमाना किस रणनीति का हिस्सा है पता नहीं| धोनी इस बार स्पिन पर भी स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पा रहे है| अब जब पहले दस ओवर धीमा खेलना है, तीस ओवर के बाद रन बनाना नहीं है और अंतिम ओवर में शॉट लग नहीं रहे ऐसे में 350 से ज्यादा का स्कोर की कल्पना व्यर्थ है| और इससे कम में गुजरा होना नहीं है| वो तो भला हो शुरूआती मुकाबले में धवन और रोहित की जोड़ी ने मैच निकल दिए वरना | बहरहाल सेमीफाइनल मुकाबले में अफगान और इंडीज नहीं होगी जो 250 से कम में सिमट जाये | यहाँ बॉलिंग ने बड़ा किरदार निभाया है| कहने का मतलब है, जितनी जल्द हो रणनीति में परिवर्तन और गलतियों से सीख लेकर दिग्गज टीम की तरह परफॉर्म करना होगा | मामला वर्ल्ड कप का है…………….

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