ICC को धोनी के ग्लव्स से ऐतराज, क्या है माज़रा?

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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और वर्तमान टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी (ms dhoni) को आईसीसी (icc)  ने एक बड़ी सजा देते हुए उनके दस्तानों से ‘बलिदान बैज’ का निशान हटाने का आदेश दिया है| धोनी ने पैरा स्पेशल फोर्सेज को सम्मान देने के लिए साउथ अफ्रीका के खिलाफ बुधवार को खेले गए मैच के दौरान ‘बलिदान बैज’ ( Balidan Badge) के निशान वाला ग्लव्स पहन विकेट कीपिंग की थी|

जिसे आईसीसी के ऐतराज के बाद उतारना होगा| 37 साल के धोनी के ग्लव्स पर ‘बलिदान बैज’ का चिह्न् उस समय दिखाई दिया जब उन्होंने मैच के 40वें ओवर के दौरान युजवेंद्र चहल की गेंद पर दक्षिणी अफ्रीकी बल्लेबाज एंडिले फेहलुकवायो को स्टंप्स आउट किया था| ग्लव्स पर दिखे इस अनोखे निशान (प्रतीक चिह्न) को हर कोई इस्तेमाल में नहीं ला सकता| यह बैज पैरा-कमांडो लगाते हैं| इस बैज को ‘बलिदान बैज’ के नाम से जाना जाता है|

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Balidan Badge क्या है? 

पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बलों के पास ‘ बलिदान बैज’ ( Balidan Badge) होता है | बैज में ‘बलिदान’ शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है| बैज चांदी की धातु से बना होता है, जिसमें ऊपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है| यह बैज केवल पैरा-कमांडो द्वारा पहना जाता है| भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों के कारण 2011 में प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी|

धोनी यह सम्मान पाने वाले कपिल देव के बाद दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं| धोनी को मानद कमीशन दिया गया क्योंकि वह एक युवा आइकन हैं और वह युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं| धोनी एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर हैं| उन्होंने पैरा बेसिक कोर्स किया है और पैराट्रूपर विंग्स पहनते हैं| महेंद्र सिंह धोनी ने प्रादेशिक सेना (टीए) की 106 पैराशूट रेजिमेंट में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में अपनी रैंक को साबित की थी |

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धोनी (dhoni) अगस्त 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे| आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न (Para Wings insignia) लगाने की योग्यता हासिल की थी| गौरतलब है कि तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद कर एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक लेंडिंग की थी|

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नवंबर 2011 में धोनी को प्रादेशिक सेना (TA) में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से सम्मानित किया गया था| तब उन्होंने कहा था कि वह सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें क्रिकेटर बना दिया| अब ICC के ऐतराज के बाद धोनी को इस चिन्ह को हटाना होगा |

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