प्रतिभा की कुंठा का सबूत अंबाती रायडू का संन्यास

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33 साल के भारतीय क्रिकेटर अंबाती रायडू ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सबको चौका दिया (Ambati Rayudu Retirement Announced ) | विश्वकप (world cup) की टीम में नहीं चुने गए और बीसीसीआई से नाराज चल रहे इस खिलाड़ी ने चिट्ठी लिखकर क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को अलविदा कहा | अंबाती रायडू का यूँ सन्यास एक बार फिर BCCI पर सवालिया निशान लगा रहा है|

न्यूजीलैंड की फूटी किस्मत ने बिगाड़ा पाकिस्तान का खेल

एक उभरता हुआ खिलाड़ी, जिसने बड़ी मेहनत से अपने प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई और जिम्बाव्बे के खिलाफ 24 जुलाई 2013 में खेले गए वनडे मैच से डेब्यू के बाद जब भी मौका मिला टीम को वो सब डिलीवर किया जो वो कर सकता था | इसकी गवाही 55 वनडे में बने 1,694 रन है जो 47.05 की औसत से बनाए गए थे | तीन शतक और 10 अर्धशतक के आलावा रायडू को उपयोगी पारी खेलने वाले बल्लेबाजों में शामिल किया जाता रहा है|


पिछले सालों में रायडू (Ambati Rayudu Retirement Announced ) को चार नम्बर के लिए तैयार किया गया | फिर अचानक उनकी जगह थ्री डायमेंशन प्लयेर के नाम पर विजय शंकर को दी गई, जिन्होंने विश्वकप के पहले पांच मुकाबले खेले और कैसे खेले उसके लिए निदाहास ट्रॉफी का फाइनल याद कीजिये | इस पर रायडू ने ट्वीट किया था कि मैंने वर्ल्ड कप देखने के लिए 3 डी ग्लासेस खरीद लिए हैं| यही से उलटी गिनती शुरू हुई | वर्ल्ड कप में जब शिखर धवन चोट के कारण बाहर हुए तो ऋषभ पंत को मौका मिला |

तो पाकिस्तान खेल सकता है सेमीफाइनल !

यहाँ तक भी ठीक था लेकिन, जब शंकर की जगह मयंक अग्रवाल को टीम ने बुलाया तो सवाल खड़े हुए | एक ओर 50 की औसत से खेलने वाला बल्लेबाज और शानदार फील्डर वहीँ दूसरी ओर वर्ल्ड कप में डेब्यू के लिए चुने गए मयंक ! बवाल जारी था लेकिन, अब रायडू का सब्र जवाब दें गया, उन्होंने बल्ला टांग दिया | वे जानते है कि अगला वर्ल्ड कप जब होगा तब वे 37 साल के हो जायेंगे और इन्तजार का फल भी नहीं मिलने वाला, साथ ही वे इस हकीकत को भी जान गए की BCCI के लिए दशकों पहले से चली आ रही बातें झूठ नहीं थी| प्रतिभा के आलावा कप्तान और मेनेजमेंट के चहेते होना जरुरी है| वर्ना शंकर और मयंक से कही भारी थे रायडू|

अब मजाक में या हकीकत में पर आइसलैंड क्रिकेट ने रायडू को अपने साथ जुड़ने का ऑफर दिया है लेकिन, यह पहली बार नहीं है जब प्रतिभा पर सियासत और सेटिंग भारी पड़ी हो | BCCI का इतिहास गवाह है कि एक दौर था जब कर्नाटक और मुंबई के बाहर के खिलाड़ी को टीम में जगह बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करना पड़ता था | फिर युग आया सौरव गांगुली का, जिन्होंने परिपाटी बदली और प्रतिभा को आगे बढ़ाया और बेमिसाल खिलाड़ी भारतीय टीम में आये और टीम जीतना सीख गई |

संन्यास के बाद इस टीम के लिए क्रिकेट खेलेंगे रायुडू!

इसी विरासत को आगे बढ़ाया छोटे शहर से आये बड़े खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी ने | टीम और कामयाब हुई| आज टीम इंडिया की बुलंदी में गांगुली और धोनी के योगदान को हर कोई जानता है| लेकिन रायडू, आजिंक्य रहाणे जैसे कई नाम है जो कम मौकों के बावजूद खुद को साबित कर चुके है और गुम हो गए क्योंकि उन्होंने खेल पर ध्यान दिया सेटिंग पर नहीं | रायडू का संन्यास भी हताशा, निराशा, गुस्से और प्रतिभा के कुंठित हो जाने का परिणाम है ……

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