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ICC World Cup : डकवर्थ-लुईस में संशोधन की दरकार

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इंग्लैंड और वेल्स में जारी विश्वकप (world cup) में भी पाक के मुक़द्दर में मायूसी ही आयी | टीम इंडिया (team India) ने अपना स्कोर 7-0 कर लिया | नया टूर्नामेंट, नया मुकाबला, नए खिलाड़ी और पहले से भी जायदा जोशीले दर्शक लेकिन परिणाम सेम टू सेम | पाक को रौंद भारत ने विजय अभियान भी जारी रखा है| विश्वकप पर फ़िलहाल बारिश का साया है और कई मैच इसमें धूल चुके है | सिलसिला जारी है और अंक तालिका पर इसका असर ज़ाहिरी तौर पर होगा|

बड़ी टीमों को कमजोर टीमों से अंक बांटना टूर्नामेंट के अंतिम पड़ाव में भारी पड़ सकता है, वहीं वर्षाबाधित मैच में दशकों से विवादित रही डकवर्थ-लुईस (Duckworth Lewis Method ) का सहारा लेना भी ज्यादातर क्रिकेट दिग्गजों और खेल के जानकारों को गले नहीं उतरा है| कई बड़े नाम इसकी खुल कर निन्दा कर चुके है जिसका कारण डकवर्थ-लुईस ( duckworth lewis method )के अजीबों-गरीब निर्णय रहे है| मसलन भारत-पाक मैच में पाक की टीम कहीं भी नहीं ठहरी थी, वहीं एक समय ऐसा भी आया जब पाक 20-21 ओवर के खेल के बाद डकवर्थ-लुईस ( duckworth lewis method in ICC world cup ))के सहारे जीत का गणित बैठाने की जुगत में था और पाक डेसिंग रूम में इस हेतु हलचल देखी भी गई थी |

World Cup में टीम इंडिया ने फिर रौंदा पाक को

जाहिर सी बात है, 336 रनों के पहाड़ को चढ़ने से कहीं ज्यादा सस्ता था 20 ओवर में 100 के करीब पहुंचना | कुलदीप के जादुई स्पेल के पहले डकवर्थ-लुईस पाक भारत पर जीत से महज 14 रन दूर था | स्कोर 100 से कुछ अधिक और 9 विकेट शेष | ऐसे में एक बार फिर डकवर्थ-लुईस सवालों के घेरे में है| वहीं डकवर्थ-लुईस ( duckworth lewis method )ने इसी मैच में अंतिम पलों में पाक को पांच ओवर में 136 रन बनाने का फ़रमान जारी किया | जहां बारिश से पहले पाक को 11 रन प्रति ओवर बनाने थे, वहीं अब 27 रन प्रति ओवर तो किसी भी टीम के लिए भारी पड़ता| पाक तो फिर भी …| ख़ैर छोड़ों | डकवर्थ-लुईस की विसंगतियां पहली बार सामने नहीं आई है | क्रिकेट जगत इसके खामियाजे पहले भी भुगत चूका है | साउथ अफ्रीका को विश्वकप में ही एक गेंद पर 22 रन बनाने का गणित इसका एक और उदाहरण है| जरुरत है फिर से गणित ज़माने की |

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”यह नियम व्यवहारिक रूप से समझने में कठिन है| डकवर्थ लुईस की आलोचना करते हुए एक क्रिकेट विशेषज्ञ ने कहा था कि डकवर्थ लुईस नियम को दुनिया में दो ही व्यक्तियों ने पूरी तरह समझा है| पहले डकवर्थ और दूसरे लुईस”|

सवाल यह भी है कि क्रिकेटर को भी ज्यादा समझ न आने वाला डकवर्थ-लुईस का स्टैटिस्टिक्स आखिर किस फॉर्मूले से बना है जो अजीबोगरीब परिणाम ही घोषित करता है जो तर्कसंगत तो बिलकुल नहीं लगता है| ऐसे में ICC अब तक इसके पन्ने पलटने की बजाय नया गणित बनाने की और अग्रसर क्यों नहीं हो रही है समझ से परे है? एक और बात डकवर्थ-लुईस में उपयोग किये गए आंकड़े और गणित भी शायद उस समय मौजूद परिस्थितियों और क्रिकेट रिकॉर्ड से लिए गए है, लेकिन अब क्रिकेट का स्वरुप पूरी तरह बदल गया है| जरुरत है इसे बदले जाने की वर्ना 336 बनाकर भी भारत जैसी बड़ी टीम 20 ओवर में ही मुकाबले हारती रहेगी और पाक जैसो पर डकवर्थ-लुईस का करम होता रहेगा | ऐसे में टॉस के बाद ही डकवर्थ-लुईस के जरिये मैच का परिणाम निकालकर सुना दिया जाना ज्यादा बेहतर होगा………………..

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