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ट्रेड वॉर क्या है?  भारतीय बाजार पर पड़ेगा कितना असर

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दुनिया की दो महाशक्तियां आमने सामने हैं- अमेरिका और चीन| इन दोनों देशों  की व्यापारिक अनबन के चलते निर्मित ट्रेड वॉर का आसार दुनिया भर के बाज़ारों पर देखने को मिल रहा है| 

जब दो या उससे अधिक देश बदले की भावना से एक-दूसरे के लिए व्यापार में अड़चनें पैदा करते हैं तो उसे ट्रेड वॉर यानी व्यापार युद्ध कहा जाता है| इसके लिए एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैरिफ या टैक्स लगा देता है या उसे बढ़ा देता है| इससे आयात होने वाली चीजों की कीमत बढ़ जाती हैं, जिससे वे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाती और उनकी बिक्री घट जाती है| अमेरिका और चीन के बीच यही स्थिति देखी जा रही है|

ट्रम्प का ट्वीट जिसमे उन्होंने ट्रेड वॉर का ऐलान किया –

अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली 60 अरब डॉलर की वस्तुओं पर ड्यूटी लगा दी है| पलटवार करते हुए चीन ने भी अमेरिका से आने वाले 3 अरब डॉलर के सामान पर टैक्स लगाने का एलान कर दिया है| ट्रम्प का मकसद इससे स्टील और एल्मुनियम क्षेत्रों को सरंक्षित करना है|
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव अच्छी खबर नहीं है| विश्वभर के बाजार इससे सहमे हुए हैं| इसके कारण चीन का शंघार्इ कंपोजिट, हांगकांग का हैंगसैंग, जापान का निक्केर्इ तीन फीसदी तक लुढ़क चुके हैं| भारतीय बाजारों में भी  एक फीसदी तक की गिरावट आर्इ है|
चीन अमेरिका का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है| अमेरिका के कुल व्यापार में चीन की हिस्सेदारी 16.4 फीसदी है| भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के टॉप 5 ट्रेडिंग पार्टनर्स में नहीं आता है, 1.9 फीसदी की व्यापार हिस्सेदारी के साथ वह इस मामले में नौवें पायदान पर है|  जानकारों का मानना है कि ग्लोबल ट्रेड वॉर से बेरोजगारी बढ़ेगी, आर्थिक रफ्तार कम होगी और ट्रेडिंग पार्टनर्स के रिश्ते बिगड़ेंगे।
भारत की बात की जाए तो विश्लेषकों का कहना है कि ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी नाम मात्र की है| इसलिए भारत पर ट्रेड वॉर के असर का अनुमान लगा पाना मुश्किल है| कुछ सेक्टरों पर इसका जरूर असर पड़ सकता है, इसमें स्टील कंपनियों पर सीधा असर पड़ सकता है| हालांकि चिंता विदेशी निवेशकों की यहां से पलायन की है, अगर ट्रेड वॉर बड़ा तो विदेशी निवेशक भारी बिकवाली शुरू कर सकते हैं|

    -यामिनी उपाध्याय

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