कमाई के मामले में सबसे आगे हैं ये इमारतें

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ताजमहल

प्रेम का प्रतीक और दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग भारत आते हैं| भारत का पर्यटन कई मायनों में ताजमहल के इर्द गिर्द घूमता है, कहना गलत नहीं होगा, लेकिन ताजमहल को लेकर विवाद भी कम नहीं रहे| अब सुप्रीम कोर्ट ने सफेद ताजमहल के पीले होते रंग पर केंद्र सरकार को जमकर फटकारा| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘ताजमहल को संरक्षण दिया जाए या बंद या ज़मींदोज़ कर दिया जाए, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि ताजमहल हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।

देश में यदि तमाम ऐतिहासिक इमारतों से होने वाली कमाई पर नज़र डालें तो पहले नंबर पर ताजमहल है।  संसद में दिए एक जवाब के मुताबिक, साल 2013 से 2016 के बीच ताजमहल की टिकट से 67.7 करोड़ की कमाई हुई| साल 2013-14 में यह कमाई 22.5 करोड़, 2014-15 में 21.3 करोड़ और 2015-16 में 23.9 करोड़ रुपए रही। सफेद संगमरमर से बने ताजमहल की खूबसूरती को देखने के लि‍ए हर साल 9 से 10 लाख टूरिस्ट भारत आते हैं।  देखा जाए तो पर्यटन और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ताजमहल बेहद ज़रूरी है।

 

क़ुतुबमीनार

यूनेस्को वर्ल्ड हेरि‍टेज साइट में शामिल दिल्ली का कुतुबमीनार भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।  इसे देखने हर साल 6 से 7 लाख टूरिस्ट भारत आते हैं। कुतुबमीनार से हर साल 1.5 करोड़ यूएस डॉलर यानी 105 करोड़ रुपए सालाना की कमाई होती है।

आगरा फोर्ट

बादशाह अकबर का बनवाया आगरा फोर्ट देखने भी हर साल बड़ी संख्या में सैलानी आगरा आते हैं।  इस फोर्ट को बनाने का काम 1573 में पूरा हुआ था।  एक रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा के किले से सरकार को करीब 106 करोड़ रुपए सालाना कमाई होती है।

हुमायूं का मक़बरा

हाल में भारत आए अमरीकी राजदूत निकी हेली को आपने दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा घूमते देखा होगा। इस मकबरे को मुगल सम्राट हुमायूं की पत्नी ने उनकी याद में बनवाया था।  इस इमारत से सरकार को सालाना 64 करोड़ रुपए की कमाई होती है।

अजंता एलोरा की गुफाएं

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बनी अजंता-एलोरा की गुफाएं एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। ये गुफाएं मुंबई से 400 किलोमीटर की दूरी पर हैं| इन्हें गुप्तकाल में बनवाया गया था। हर साल यहां 3 से 4 लाख टूरिस्ट इन खूबसूरत गुफाओं को देखने आते हैं। अजंता और एलोरा की गुफाओं से सालाना 3 करोड़ रुपए की कमाई होती है।

फतेहपुर सीकरी

आगरा का फतेहपुर सीकरी शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मकबरे की नींव 1569 में अकबर ने रखी थी।  फतेहपुर सीकरी से सरकार को सालाना 63 करोड़ रुपए की कमाई होती है।

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