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ये हैं भारत के सबसे अलग गांव

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत गांवों से बनता है। यही कारण है कि भारत को गांवों का देश कहा जाता है। गांवों में इस देश की आत्मा बस्ती है। काम के सिलसिले में गांव की आधी आबादी शहरों में बसने लगी है, लेकिन अभी भी भारत की जान उसके गांव ही हैं| हरे-हरे खेतों, नीले पानी वाले तालाब और नीले आकाश के तले खाट पर लेटने में जो सुकून मिलता है, उसके आगे सब फ़ेल है।

आइए, आपको देश के ऐसे ही कुछ गांवों के बारे में बताते हैं|

पोठानिक्कड़, केरल

केरल का यह गांव देश का सबसे साक्षर गांव है। केरल के इस गांव को 100 प्रतिक्षत साक्षरता हासिल है। इस गांव का सबसे पुराना स्कूल सेंट मेरी हाईस्कूल है।  आपको जानकर शायद हैरानी हो कि 2011 में यहां 17,563 निवासी रहते थे और सभी शिक्षित थे।

छप्पर, हरियाणा

हरियाणा, एक ऐसा राज्य जहां महिला लिंग अनुपात बहुत कम है। इस राज्य में एक ऐसा गांव भी है, जहां बेटियों के जन्म पर मिठाई बांटी जाती है। यहां की पूर्व सरपंच नीलम ने बेटियों और महिलाओं की ज़िन्दगी सुधारने की ठान ली थी और वे कामयाब भी हुई। यहां अब बेटियों और महिलाओं का जीवन काफी बेहतर है।

मावलीनांग, मेघालय

मेघालय के मावलीनांग गांव को एशिया का सबसे साफ़-सुथरा गांव घोषित किया गया है। 2003 में ही इस गांव को यह उपलब्धि मिल गई थी। प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा ही है। गांववाले ख़ुद ही अपने गांव की सफ़ाई करते हैं। गांव के कोने-कोने में कूड़ेदान लगे हैं और यहां आपको प्लास्टिक के रैपर, सिगरेट के टुकड़े कुछ भी नहीं मिलेंगे।

पुनसारी, गुजरात

पुनसारी में इतनी सुविधाएं हैं, जो कई शहरों में भी नहीं होती। इस गांव में 24 घंटे वाईफाई व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। एक प्राइमरी स्कूल होने के अलावा यहां की सड़कों पर लगी बत्तियां सौर ऊर्जा से चलती हैं। इतना ही नहीं, प्रत्येक गांववाले के पास 1 लाख का एक्सीडेंट बीमा और 25 हज़ार का मेडिकल बीमा भी है।

हिवड़े बाजार, महाराष्ट्र

यह गांव है अहमदनगर ज़िले में| एक ऐसा ज़िला, जो अक्सर सूखे की मार झेलता है। हिवड़े बाज़ार देश का एकमात्र ऐसा गांव है, जहां 60 लखपति हैं और एक भी ग़रीब नहीं। 1990 में पोपटराव पवार को इस गांव का सरपंच चुना गया और उन्होंने इस गांव की कायापलट दी। गांव में नशीले पदार्थों पर रोक लगाने से लेकर बरसात के पानी के उचित प्रयोग तक पवार ने गांव में यह सब शुरू करवाया। नतीजा यह हुआ कि गांव की प्रति व्यक्ति आय, 830 से बढ़कर 30 हज़ार हो गई।

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