राजस्थान के चमत्कृत मंदिर का यह है रहस्य

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भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम को दुनिया उनके सिद्धांतों को लेकर नमन करती है| आज अक्षय तृतीया है| इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है| देश के अनेक स्थानों पर आज कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं|

भारत में कई ऐसे स्थल हैं, जो कई रहस्यों को खुद में समेटे हैं| ऐसे ही स्थलों में से एक है राजस्थान का परशुराम महादेव गुफा मंदिर| आज परशुराम जयंती पर हम आपको इस मंदिर का महात्म्य बताते हैं| इस मंदिर को अपने फरसे से बनाया था|

भगवान परशुराम के बारे में मान्यता है कि आज भी वे पृथ्वी पर तपस्या में लीन हैं। मान्यता है कि विष्णु के अवतार भगवान परशुराम ने इस मंदिर का निर्माण स्वयं अपने फरसे के वार से किया था। इस मंदिर को टांगीनाथ धाम एवं परशुराम महादेव गुफा मंदिर भी कहते हैं।  यह एक चमत्कारिक मंदिर है। यहां शिवलिंग के पास एक छिद्र है। यदि आप शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे तो सारा पानी छिद्र में समा जाएगा  परंतु यदि आप शिवलिंग का अभिषेक दूध से करेंगे तो वह छिद्र के भीतर नहीं जाता है। इस चमत्कार को लेकर भी कई लोग आज भी हैरत में रहते हैं|

भगवान शिव का था आशीष

अरावली की पहाड़ियों की गुफा में परशुराम ने अपने फरसे के वार से चट्टान पर मंदिर का निर्माण कर दिया था। इस गुफा के अंदर एक स्वयंभू शिवलिंग है। भगवान परशुराम की शक्ति के पीछे भगवान शिव का ही आशीर्वाद माना जाता है| इस स्थल पर ही भगवान परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की थी। परशुराम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें फरसा, धनुष और अक्षय तरकश दिया था। इस तरकश के तीर कभी भी खत्म नहीं होते थे। गुफा में स्थित शिला पर एक राक्षस की आकृति बनी हुई है, जिसका अंत परशुराम ने ही किया था। इस गुफा मंदिर तक जाने के लिए 500 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। इस गुफा मंदिर के अंदर एक स्वयंभू शिवलिंग है, जहां विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने भगवान शिव की कई वर्षो तक कठोर तपस्या की थी।

ऐसे पहुंचे परशुराम

महादेव का मंदिर राजस्थान के राजसमन्द और पाली जिले की सीमा पर स्थित है। मुख्य गुफा मंदिर राजसमन्द जिले में आता है जबकि कुण्ड धाम पाली जिले में आता है। पाली से इसकी दूरी करीब 100 किमी और विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग से मात्र 10 किमी है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3600 फ़ीट है। यहां से कुछ दूर सादड़ी क्षेत्र में परशुराम महादेव की बगीची है। गुफा मंदिर से कुछ ही मील दूर मातृकुंडिया नामक स्थान है, जहां परशुराम को मातृहत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। यहां पहुंचने के लिए बस के माध्यम से आसानी से राजसमन्द से पहुंच सकते हैं|

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