तलाश है मानसिक शांति और सुकून की तो जरूर जाएं रुमटेक मठ

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अपने जीवन की भागम-भाग के बीच लोग थोड़ा बहुत समय निकालकर कहीं बाहर घूमने-फिरने का प्लान तो जरूर बनाते हैं। लेकिन अधिकतर लोग हिल-स्टेशन या फिर पहाड़ों पर घूमने जाने का प्लान करते हैं। अगर आप शोर-शराबे से दूर कहीं सुकून भरी जगह पर जाना चाहते हैं और प्रकृति के आनंद के साथ मन की शांति चाहते हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आपको बेहद ही शांति (Heavenly Peaceful Places to Visit ) का अनुभव प्राप्त होगा। तो चलिए जानते हैं उन जगहों (Rumtek Monastery, Thiksay Monastry) के बारे में।

Heavenly Peaceful Places to Visit :

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थिकसे मोनेस्ट्री (Thiksay Monastry)

सबसे पहले हम आपको बताते हैं थिकसे मोनेस्ट्री (Thiksay monastry) के बारे में। यह भारत का दूसरा सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख मठ है। यह मठ लेह क्षेत्र के पहाड़ की चोटी पर स्थित है। पहाड़ी ढलान के ऊपर इस मठ को बनाया गया है। इस मठ में कई इमारतें हैं जिन्हें उनके महत्व और आकर के अनुसार आरोही क्रम में बनाया गया है। यहां सफ़ेद रंग की व्यवस्थित ये इमारतें ग्रीस की याद दिलाती हैं। जब बादलों से भरा मौसम होता है तब यहां का नज़ारा बेहद अद्भुत और सुहाना होता है। भिक्षुओं से भरा यह क्षेत्र मानसिक शांति प्रदान करता है और सुकून देता है।

रुमटेक मठ (Rumtek Monastery)

स्वर्ग से भी खूबसूरत नज़ारे हैं यहां के…

यह मठ सिक्किम में स्थित है और यह यहां का सबसे बड़ा मठ माना जाता है। सिक्किम के सबसे सुंदर मठ में रुमटेक मठ (Rumtek Monastery) का नाम शामिल है। यहां प्रातः काल में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा जो प्रार्थना की जाती है वह बेहद ही मनमोहक होती है और इसका नज़ारा मन को शांति और सुकून देने वाला होता है। इस मठ में पहुंचने पर आपको विभिन्न तरह की थांगका पेंटिंग, दुर्लभ बौद्ध कलाकृतियां, भगवान बुद्ध के 1001 सोने के मॉडल और कई आकर्षक व मनमोहक चीज़ें देखने को मिलेगी। मठ में सुबह-शाम जप किया जाता है। रुमटेक मठ (Rumtek Monastery) को तिब्बत के सुरफू मठ की तरह ही बनवाया गया है।

सिक्किम का यह मठ (Rumtek Monastery) चार-मंजिला है जो सिक्किम का सबसे बड़ा मठ है। इस मठ के बारे में कहा जाता है कि जब तिब्बत पर चीन ने आक्रमण किया था तब 16वें ग्यालवा करमापा के अवतार तिब्बत से अपने कुछ भिक्षुओं के साथ यहां आ गए थे। इसके बाद यहां धार्मिक अध्ययन के लिए एक केंद्र खोलने के उद्देश्य से इस मठ का निर्माण किया गया। इस मठ के ठीक पीछे बेहद ही सुंदर नालंदा इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज बना हुआ है। इस इंस्टीट्यूट के छोटे से हॉल में सोने का स्तूप स्थापित है। प्रतिवर्ष अक्टूबर माह में यहां वार्षिक नृत्य का आयोजन किया जाता है।

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इस दौरान कई प्रकार के रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस मठ को 300 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है।

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