अद्भुत और बेमिसाल है चंडीगढ़ का रॉक गार्डन

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दुनिया के मशहूर गार्डन्स में शुमार चंडीगढ़ की शान कहा जाने वाला रॉक गार्डन अपने आप में बहुत ही बेमिसाल है। चंडीगढ़ में सुखना झील के निकट बने इस गार्डन की खासियत है शहरभर से निकले कचरे से निर्मित यहां की कलाकृतियां। जी हां, वेस्ट मटेरियल से बनाया गया यह गार्डन दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इस गार्डन के निर्माण की शुरुआत भारत के मशहूर रॉक आर्टिस्ट नेकचंद ने सन 1957 में की थी। नेकचंद ने अपनी लगन, धैर्य और अथक परिश्रम से 18 सालों में इस खूबसूरत बगीचे का निर्माण किया, जो 40 एकड़ में फैला है। इस गार्डन का उद्घाटन सन 1976 में किया गया।

नेकचंद अपनी कल्पनाओं को आकार देने के लिए प्रयासरत थे और वे अपने खाली समय में अपनी साइकिल पर बैठकर बेकार चीज़ों जैसे ट्यूब लाइट्स, टूटी-फूटी चूड़ियां, प्लेट, कप, फ्लश की सीट, बोतल के ढक्कन और अलग-अलग तरह के कचरे को एकत्र करते रहते थे। नेकचंद इस कचरे से ऐसी कलाकृति निर्मित करना चाहते थे, जो पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित कर सके।

आखिरकार नेकचंद की मेहनत रंग लाई और रॉक गार्डन का निर्माण हुआ। आज इस गार्डन को चंडीगढ़ की शान कहा जाता है और पूरे विश्व में इसे ख्याति प्राप्त है। दुनियाभर से लोग इस गार्डन में कचरे से बनी उन कलाकृतियों को देखने आते हैं, जो कभी नेकचंद का सपना हुआ करती थीं।

हालांकि शुरुआत में इस गार्डन को भी कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और कई राजनेताओं ने इस गार्डन को अवैध निर्माण बताकर मिटाना चाहा, लेकिन नेकचंद की नेकी के आगे किसी की नहीं चल सकी और यह गार्डन एक मिसाल बन गया।

नेकचंद के इस अनोखे हुनर को दुनिया आज भी अचरज भरी निगाहों से देखती है। नेकचंद के इस जादुई गार्डन को विश्व के कई संग्रहालयों में भी स्थान प्राप्त हो चुका है। वॉशिंगटन के नेशनल चिल्ड्रन म्यूजियम के अलावा दुनियाभर के कई संग्रहालयों में इस गार्डन को प्रदर्शित किया गया है। गार्डन के खुलने का समय सुबह 9 बजे से रखा गया है और यह शाम 7 बजे तक लोगों के लिए खुला रहता है। हालांकि सर्दियों के मौसम में इसे शाम 6 बजे बंद कर दिया जाता है। इस गार्डन में दाखिल होने के लिए 30 रुपए का टिकट लेना पड़ता है, लेकिन बच्चों को मात्र 10 रुपए में इस गार्डन का अद्भुत नज़ारा देखने दिया जाता है। इस गार्डन की खासियत है बेकार ट्यूबलाइट्स से बनाई गई दीवार के सामने खड़ी, टूटे हुए कप और तश्तरियों से निर्मित मॉडल्स की सेना, जो मानो अपने पास बुला रही हो। वहीं टूटे हुए कंगनों से बनी गुड़ियां ऐसी लगती हैं, जैसे अभी बोल पड़ेंगी। इस गार्डन में जो भी एक बार जाता है, वह यहां के नजारों को कभी नहीं भूलता।

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