Dharkundi Ashram : धारकुंडी आश्रम का प्राकृतिक सौंदर्य मानो धरती पर स्वर्ग

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सतना: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धारकुंडी आश्रम प्रकृति से परिपूर्ण मानो धरती पर स्वर्ग है। सतपुड़ा के पठार की विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित धारकुंडी में प्रकृति का शानदार सौंदर्य देखने को मिलता है पर्वत की गुफाओं में साधना स्थल, दुर्लभ शैल चित्र, पहा़ड़ों से लगातार बहती जल की धारा, गहरी खाईयां और जीवाश्म भी पाए जाते हैं (Dharkundi Ashram Tourism)।

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धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram Tourism) में प्रतिदिन हजारो की संख्या में लोग भोजन प्राप्त करते है जो की यहाँ आने वाले पर्यटक या आसपास के दर्शानार्थी होते है यहाँ जलकुंड में बहने वाली जलधारा की रफ़्तार एक जैसी ही होती है चाहे कितना भी सूखा हो यहाँ की जलधारा हमेशा उतनी ही तेज़ी से बहती है इस आश्रम में भ्रमण करने के बाद इस आश्रम से जाने का मन नहीं करता। धारकुंडी आश्रम सरभंग मुनि आश्रम के पास है। जिसका वर्णन रामायण में मिलता है।

ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में युधिष्ठिर और दक्ष का प्रसिद्ध संवाद यहीं के एक कुंड में हुआ था जिसे अघमर्षण कुंड कहा जाता है। यह कुंड भूतल से करीब 100 मीटर की गहराई पर  है। धारकुंडी मूलतः दो शब्दों से मिलकर बनता है। धार तथा कुंडी यानी जल की धारा और जलकुंड। विंध्याचल पर्वत श्रेणियों के दो पर्वत की संधियों से प्रस्फुटित होकर प्रवाहित होने वाली जल की निर्मल धारा यहां एक प्राकृतिक जलकुंड का निर्माण करती है।

 

समुद्र तल से 1050 फुट ऊपर स्थित धारकुंडी में प्रकृति का स्वर्गिक सौंदर्य आध्यात्मिक ऊर्जा का अक्षय स्रोत उपलब्ध कराता है। यहां जनवरी में जहां न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री रहता है वहीं अधिकतम तापमान 18 डिग्री रहता है। जून माह में न्यूनतम 20 डिग्री तथा अधिकतम तापमान 45 डिग्री रहता है। योगिराज स्वामी परमानंद जी परमहंस जी के सान्निध्य में सच्चिदानंद जी ने चित्रकूट के अनुसूया आश्रम में करीब 11 वर्ष साधना की। इसके बाद सच्चिदानंद जी महाराज 1956 में यहां आए और अपनी आध्यात्मिक शक्ति से यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को आश्रम के माध्यम से एक सार्थक रूप दिया। उनके आश्रम में अतिथियों के लिए रहने और भोजन की मुफ्त में उत्तम व्यवस्था है।

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विशेष है कि महाराज जी अपने खेतों में उपजे अन्न से ही अपने आगंतुकों को भोजन कराते हैं। संघर्ष भरे जीवन के बीच कुछ दिन यहां आकर व्यक्ति को अध्यात्म और शांति का अनुभव होता है और मन मस्त हो जाता है प्रकृति के बीच रहकर सभी हिन्दू त्योहारों पर यहाँ पर भीड़ देखी जा सकती है लेकिन  विशेष तौर पर यहाँ गुरु पूर्णिमा के दिन बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते है नुभव हो सकता है।

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-Mradul tripathi

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