विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी मन्दिर के सुंदरता का वर्णन

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1-मीनाक्षी मन्दिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में द्रविड़ वास्तुकला में किया गया था। 65 हज़ार वर्ग मीटर में फैले इस विशाल मंदिर को यहाँ शासन करने वाले विभिन्न वंशों ने विस्तार प्रदान किया। दक्षिण में स्थित यह इमारत सबसे ऊँची है जिसकी ऊँचाई 160 फीट है। मीनाक्षी मन्दिर (Meenakshi Amman Temple) के विशाल अन्तर्गृह में अनेक देवी देवताओं की भव्य मूर्तियाँ स्थापित की गयी हैं। मीनाक्षी मन्दिर के केन्द्र में मीनाक्षी की मूर्ति है और उससे थोड़ी ही दूर भगवान गणेश जी की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है जिसे एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया है।

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2-मीनाक्षी मन्दिर (Meenakshi Amman Temple) में कई आकर्षण के केंद्र हैं जैसे हज़ार स्तम्भ मंडपम (वास्तविक नाम: स्तंभ मण्डप), प्रत्येक स्तंभ थाप देने पर भिन्न स्वर निकालता है। स्तंभ मण्डप के दक्षिण में कल्याण मण्डप स्थित है, जहां प्रतिवर्ष मध्य अप्रैल में चैत्र मास में चितिरइ उत्सव मनाया जाता है। इसमें शिव-पार्वती के विवाह का आयोजन किया जाता है। स्वर्णकमल पुष्कर (वास्तविक नाम: पोर्थमराईकुलम) एक पवित्र सरोवर है जो कि 165 फीट लम्बा एवं 120 फीट चौड़ा है। यहाँ प्रतिदिन हज़ारों की संख्‍या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

 

3 – माँ मीनाक्षी भगवान शिव की पत्नी पार्वती का अवतार और भगवान विष्णु की बहन भी है। इस मंदिर में मां मीनाक्षी की पूजा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ पूरे दक्षिण भारत में करने की परम्परा है। हिन्दु पौराणिक कथानुसार भगवान शिव सुन्दरेश्वरर रूप में अपने गणों के साथ पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने मदुरई नगर में आये थे।

4 – मीनाक्षी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। इस मन्दिर को देवी पार्वती के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। देवी पार्वती ने पूर्व में पाँड्य राजा मलयध्वज, मदुरई के राजा की घोर तपस्या के फलस्वरूप उनके घर में एक पुत्री के रूप में अवतार लिया था। वयस्क होने पर उसने नगर का शासन संभाला। तब भगवान आये और उनसे विवाह प्रस्ताव रखा जो उन्होंने स्वीकार कर लिया।

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5 – मां का यह विशाल भव्य मंदिर तमिलनाडू के मदुरै शहर में है। यह मंदिर मीनाक्षी अम्मन मंदिर प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। माँ मीनाक्षी का यह अम्मन मंदिर को विश्व के नए सात अजूबों के लिए नामित किया गया है।

6 – मंदिर का मुख्य गर्भगृह 3500 वर्ष से अधिक पुराना माना जा रहा है। यह मंदिर भी भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप में अपने गणों के साथ पाड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने मदुरै नगर आए थे। क्योंकि मीनाक्षी देवी मां पार्वती का रुप हैं।

7 – इस विशाल भव्य मंदिर का स्थापत्य एवं वास्तु भी काफी रोचक है। जिस करण माँ  का यह मंदिर को सात अजूबों में नामांकित किया गया है। इस इमारत में 12 भव्य गोपुरम है, जिन पर महीन चित्रकारी की है। इस मंदिर का विस्तार से वर्णन तमिल साहित्य में प्रचीन काल से होता आया है।

8 – वर्तमान में जो मंदिर है यह 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था। मंदिर में आठ खंभो पर आठ लक्ष्मीजी की मूर्तियां अंकित हैं। इन पर भगवान शंकर की  पौराणिक कथाएं उत्कीर्ण हैं। यह मंदिर मीनाक्षी या मछली के आकार की आंख वाली देवी को समर्पित है। मछली पांड्य राजाओं को राजचिह्न है।

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9-मीनाक्षी मन्दिर से जुड़ा़ सबसे महत्त्वपूर्ण उत्सव है मीनाक्षी तिरुकल्याणम, जिसका आयोजन चैत्र मास (अप्रैल के मध्य) में होता है। इसके अलावा अन्य हिन्दु उत्सव जैसे नवरात्रि एवं शिवरात्रि भी यहाँ धूम धाम से मनाये जाते हैं।

10-मीनाक्षी मन्दिर में सुबह 5 बजे से दोपहर 12.30 बजे, शाम 4 बजे से रात 9.30 बजे तक।

 

-Mradul tripathi

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