वास्तुकला का करिश्मा है चांद बावड़ी

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हमने बहुत कुएं और बावड़ियां देखी हैं, लेकिन हम आपको ऐसी बावड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी बावड़ी है। जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजामार्ग एनएच-11 पर स्थित दौसा जिले का ह्रदय कहे जाने वाले सिकंदरा कस्बे से उत्तर की ओर कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है आभानेर गांव। इसी गांव में स्थित है चांद बावड़ी ।

चांद बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी है। बावड़ी का निर्माण करीब 1200 साल पहले हुआ था। यह बावड़ी 35 मीटर के वर्गाकार आकृति में बनी हुई है। इसके अंदर कुल 3500 सीढ़ियां है। इस बावड़ी का निर्माण राजा चांद ने करवाया था। सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र इसकी सीढ़ियां है। जिस सीढ़ी के जरिये आप नीचे जाते हैं, उन्हीं के जरिये आप वापस ऊपर नहीं जा सकते। यही इसकी वास्तुकला का करिश्मा है।

बावड़ी के ऊपर हसरत माता का मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि जो सच्चे मन से माता से कुछ मांगता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। इस बावड़ी को इतना गहरा बनाया गया है कि यदि कोई गिरे तो वापस ऊपर न आ सके।

इसकी गुप्त सुरंगों का इस्तेमाल राजा अपने सेनापति और सैनिकों के साथ युद्ध के वक्त किया करते थे।

इस बावड़ी की खासियत है कि जैसे-जैसे नीचे जाते हैं, इसकी चौड़ाई कम होती है। इस बावड़ी के अंदर दो गुफाएं हैं। उनमें एक को अंधेरी और दूसरी को उजाले की गुफा कहते हैं।

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