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ताज उल मस्जिद की सैर

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ताज उल मस्जिद मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में स्थित है। ताज उल मस्जिद का अर्थ है ‘मस्जिदों का ताज’। ताज उल मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद से प्रेरणा लेकर बनाई गई है। ताज उल मस्जिद में हर साल तीन दिन का इज्तिमा उर्स होता है। जिसमें देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। भोपाल की ताज-उल मस्जिद भारत ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। ताज-उल मस्जिद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद मानी जाती है,

लेकिन अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाए तो ये दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद की संरचना काफी आकर्षक और राजसी है। बस ताज-उल मस्जिद का इतिहास कुछ ऐसी थी कि इसका निर्माण कार्य बमुश्किल पूरा हो पाया और आज ये इमारत दुनिया की खूबसूरत इमारतों में से एक है।

गुलाबी रंग से रंगी ताज-उल मस्जिद में सफेद गुंबदों के साथ विशाल मीनारें हैं। बलुआ पत्थर से बनी इस इमारत के बारे में बताया जाता है कि ताज-उल मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद से प्रेरणा लेकर बनाई गई थी। ताज-उल मस्जिद जामा मस्जिद की नकल है। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। यहां हर साल तीन दिन का इज्तिमा उर्स होता है, जिसमें दुनियाभर के जमाते शिरकत करते हैं। तो चलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको भोपाल शहर और एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक ताज-उल मस्जिद का इतिहास के बारे में बताते हैं।

ताज उल मस्जिद किसने बनवाया –
सिकन्दर बेगम ने ताज उल मस्जिद को तामीर करवाने का ख्वाब देखा था, इसलिए ताज उल मस्जिद सिकन्दर बेगम के नाम से सदा के लिए जुड़ गयी। सिकन्दर बेगम 1861 में इलाहाबाद दरबार के बाद जब वह दिल्ली गई तो उन्होंने देखा कि दिल्ली की जामा मस्जिद को ब्रिटिश सेना की घुड़साल में तब्दील कर दिया गया है। सिकन्दर बेगम ने अपनी वफ़ादारियों के बदले अंग्रेज़ों से इस मस्जिद को हासिल कर लिया और ख़ुद हाथ बँटाते हुए इसकी सफाई करवाकर शाही इमाम की स्थापना की। ताज उल मस्जिद से प्रेरित होकर उन्होंने तय किया की भोपाल में भी ऐसी ही मस्जिद बन वायेगी। सिकन्दर जहाँ का ये ख्वाब उनके जीते जी पूरा न हो सका फिर उनकी बेटी शाहजहाँ बेगम ने इसे अपना ख्वाब बना लिया।

ताज उल मस्जिद का वैज्ञानिक नक्शा-
शाहजहाँ बेगम ने ताज उल मस्जिद का बहुत ही वैज्ञानिक नक्शा तैयार करवाया। ध्वनि तरंग के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए 21 ख़ाली गुब्बदों की एक ऐसी संरचना का नक्शा तैयार किया गया कि मुख्य गुंबद के नीचे खडे होकर जब इमाम कुछ कहेगा तो उसकी आवाज़ पूरी मस्जिद में गूँजेगी। शाहजहाँ बेगम ने ताज उल मस्जिद के लिए विदेश से 15 लाख रुपए का पत्थर भी मंगवाया चूँकि इसमें अक्स दिखता था अत: मौलवियों ने इस पत्थर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।

आज भी ऐसे कुछ पत्थर ‘दारुल उलूम’ में रखे हुए हैं। धन की कमी के कारण उनके जीवंतपर्यंत यह बन न सकी और शाहजहाँ बेगम का ये ख्वाब भी अधूरा ही रह गया और गाल के कैंसर से उनका असामयिक मृत्यु हो गई। इसके बाद सुल्तानजहाँ और उनके बेटा भी इस मस्जिद का काम पूरा नहीं करवा सके।

मस्जिद की विशेषताएँ-
#ताज उल मस्जिद, भोपाल
#ताज उल मस्जिद में सुर्ख लाल रंग की मीनारें हैं, जिनमें सोने के स्पाइक जड़े हैं।
#गुलाबी रंग की इस विशाल मस्जिद की दो सफ़ेद गुंबदनुमा मीनारें हैं, जिन्‍हें मदरसे के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता है।

#इसके चारों ओर दीवार है और बीच में एक तालाब है।
#ताज-उल-मस्जिद का प्रवेश द्वार दो मंजिला है और वह बहुत बेहद ख़ूबसूरत है।
#ताज-उल-मस्जिद के प्रवेश द्वार के चार मेहराबें हैं और मुख्य प्रार्थना हॉल में जाने के लिए 9 प्रवेश द्वार हैं। पूरी इमारत बेहद ख़ूबसूरत है।
#गुलाबी पत्थर से बनी इस मसजिद में दो विशाल सफ़ेद गुंबद हैं। मुख्य इमारत पर तीन सफ़ेद गुंबद और हैं।

ताज-उल मस्जिद कैसे पहुंचे –
ताज-उल मस्जिद भोपाल स्टेशन से कुल 3 किमी की दूरी पर स्थिति है, जहां पहुंचने में मात्र 8 से 10 मिनट का समय लगता है। अगर आप फ्लाइट से जाएं तो भोपाल में राजा भोज एयरपोर्ट है, जहां से शहर 15 किमी की दूरी पर है। अगर आप एयरपोर्ट से बड़ी मस्जिद के लिए टैक्सी करेंगे तो 150-200 रूपए चार्ज लगेगा। इसके अलावा बस या ट्रेन से भी आप आसानी से भोपाल स्टेशन पहुंच सकते हैं। यहां से ताज-उल मस्जिद जाने के लिए आपको टैक्सी या ऑटो हायर करना होगा, जो सीधे आपको ताज-उल मस्जिद पर ही छोड़ेगा।

ताज-उल मस्जिद कब जाए –
ताज-उल मस्जिद दुनियाभर की बड़ी इमारतों में मशहूर है। इसे देखने के लिए हर साल कई लोग आते हैं। खासतौर से इज्तिमा के दिनों में यहां भारी संख्या में लोगों की भीड़ होती है। बड़ी मस्जिद की यात्रा आप किसी भी महीने में कर सकते हैं। यहां कोई एंट्री फीस नहीं है। किसी भी धर्म के लोग ताज-उल मस्जिद में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन शुक्रवार के दिन मुस्लिम लोगों को छोड़कर अन्य धर्म के लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती।

(इंटरनेट के  माध्यम से प्राप्त जानकारी )

-Mradul tripathi

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