मैसूर के दर्शनीय स्थल

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मैसूर कर्नाटक राज्य का एक खुबसूरत शहर है। मैसूर को बाग बगीचो, महलो और मंदिरो का शहर भी कहा जाता है। यह नगर कभी वोद्यार राजाओ की राजधानी हुआ करता था। यहा विशाल गुम्बद, मीनारे, महल, बाग बगीचे व मंदिर देखने योग्य है। मैसूर के दर्शनीय स्थल विश्व भर में प्रसिद्ध है। जिनको देखने के लिए यहा लाखो पर्यटक प्रतिवर्ष यहा आते है। अपने इस लेख में हम इन्ही मैसूर के दर्शनीय स्थलोसकी सैर करेंगें और उनके बारे में विस्तार से जानेंगें।

मैसूर पैलेस-

मैसूर पैलेस भारत के कर्नाटक राज्य में मैसूर शहर में स्थित एक ऐतिहासिक ईमारत है। मैसूर के इस किले को अंबा विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता हैं। मैसूर पैलेस शाही परिवार का महल रहा है और आज भी इस महल पर उन्ही का अधिकार है। जिस भूमि पर यह महल खड़ा हैं वह पुरगिरी के नाम से जानी जाती हैं। यह पैलेस मैसूर शहर के केंद्र में स्थित हैं और इसका मुख चामुंडी हिल्स की ओर हैं।

जगमोहन पैलेस-

यह मैसूर के दर्शनीय स्थल में दूसरा प्रमुख दर्शनीय स्थल है। यह पुराना राजमहल है। जो जगमोहन पैलेस के नाम से जाना जाता है। अब इसे संग्रहालय और आर्ट गैलरी का रूप दे दिया गया है। इस संग्रहालय में प्राचीन वाद्य यंत्र, टीपू सुल्तान और हैदर अली की तलवारे और शिवाजी का बघनखा मुख्य रूप से दर्शनीय है। फ्रांस से लाई गई एक संगीत घडी भी यहा मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

चामुंडा देवी मंदिर-

समुद्र तल से 1062 मीटर ऊंची चामुडीं पहाडी पर बने चामुंडेश्वरी मंदिर तक एक हजार सीढिया चढकर या पैदल सडक के रास्ते से जाया जा सकता है। 12वी सदी में निर्मित इस मंदिर के पास ही महिषासुर की विशाल प्रतिमा है। कहा जाता है की इस प्रतिमा के नाम पर ही इस शहर का नाम मैसूर पडा है। यह प्रसिद्ध मंदिर मैसूर के दर्शनीय स्थल में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

वृंदावन गार्डन-

मैसूर के दर्शनीय स्थल मे यह पिकनिक मनाने का सबसे उपयुक्त स्थान है। यह स्थान मैसूर शहर से लगभग 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गार्डन कृष्णा राजा वोइयार की स्मृति में बनवाया गया था। यह खुबसूरत गार्डन 4.5 वर्ग किलोमीटर के क्षत्रफल में फैला हुआ है। खुबसूरत पेड पौधो और संगीतमय फव्वारो से सजा यह गार्डन सैलानियो की काफी पसंदीदा जगह में से है।

श्रीरंगपट्टणम-

यह स्थान मैसूर से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक समय में यह स्थान टीपू सुल्तान की राजधानी हुआ करता था। यहा टीपू सुल्तान और हैदर अली के मकबरे भी है। जिन्हे सैलानी काफी पसंद करते है। क्योकि भारतीय और मुगल स्थापत्य कला के अदभुत मिश्रण से बने यह मकबरे वास्तुकला के बेजोड नमूने है। यहा श्री रंगनाथ स्वामी का मंदिर भी दर्शनीय है।

नंजनगुडू-

मैसूर से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नंजूनडेशवर मंदिर को श्री कंटेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह शिव मंदिर है और यह द्रविड़ शैली में बना है। पूर्वजों के अनुसार इस मंदिर में भगवान शिव का वास था। इस मंदिर को गंगा शासनकारों ने बनाया था और इसकी देख रेख होय्सला राजाओं ने की थी।

इतिहासकारों का यह कहना है कि नंजुंडेश्वर मंदिर पर अर्पित कई प्रार्थनाओं के बाद टीपू सुल्तान का बीमार हाथी ठीक हो गया। इसलिए टीपू सुल्तान और हैदर अली को नंजूनडेशवर मंदिर पर अटूट विश्वास था। स्थानीय लोगों का यह मानना है कि इस मंदिर के दर्शन से भक्तों के कष्टों का निवारण होता है।

(इंटरनेट के माध्यम से  प्राप्त जानकारी )

-Mradul tripathi

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