बेमिसाल खूबसूरती का गढ़ – Kajligarh

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जीवन प्रकृति से है और प्रकृति ही जीवन है। यह अनुभव हमे शहर की आबोहवा से दूर या तो किसी गांव में खेतों की सोंधी-सोंधी खुशबू में मिलता है या तो फिर प्रकृति के ही बनाये किसी बहते झरने की उछलती-कूदती बौछारों में। इसी का एक बेहतरीन उदहारण 18वी शताब्दी में होलकरकालीन समय में बना कजलीगढ़ किला भी है। शिकारगाह और घुड़सवारी के लिए महाराज शिवाजी राव होल्कर द्वारा बनवाया गया मशहूर कजलीगढ़ किला (Kajligarh Fort) रहस्यों से भी भरपूर है। 

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Kajligarh Fort Video :

तो हमारा सफर शुरू हुआ मिनी मुंबई के नाम से मशहूर इंदौर शहर से। लगभग 3 बजे इस सफर की शुरुआत हुई, रास्ते में बारिश का मौसम और हमारी SUV की इंदौर बाइपास में 100 से 120 किलोमीटर की स्पीड ने हमे कुछ ही देर में सिमरोल पहुंचा दिया। बारिश के सुहाने मौसम ने रास्ता और खुशनुमा बना दिया और SUV में चलते पुराने गानों ने दिल जीत लिया। पहुचते-पहुचते शाम के लगभग 4 बज गए और हम पहुँच चुके थे कजलीगढ़ किला (Kajligarh Fort)। अंदर आते ही बाकायदा हमारा स्वागत हुआ, जो कि बंदरों ने किया। पर स्वागत तो स्वागत होता है।

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फिर हम आगे बढ़े और किले कि कुछ सीडियाँ चड़े जो ही ऊपर पहुंचे यहां का नज़ारा तो बस उफ़्फ़ था। इतना घाना जंगल ओर गहरी खाई कि कोई गिर जाए तो गुम ही हो जाए। शाम के लगभग 4:30 बज रहे थे, लेकिन घने बादलों के कारण ऐसा लग रहा था जैसे सूरज डूब चुका हो। जैसे-तैसे हिम्मत करके हमने कमेरे में खूबसूरत नज़ारे लेने कि कोशिश कि लेकिन अचानक बारिश इतनी तेज़ हो गई कि केमेरा खराब होने के डर से वापस रख दिया। यह किला होल्कर वंश के लिए मशहूर इंदौर शहर से तकरीबन 28 किलोमीटर दूर है। इस किले (Kajligarh Fort History) के इतिहास में 2 कहानियां प्रचलित है।

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इतिहास में इस किले (Kajligarh Fort) का वैसा ज़िक्र नहीं है, जैसा अक्सर एतिहासिक धरोहरों का होता है। इंदौर का इतिहास किले को होल्करवंशी बताता है, लेकिन जब वहाँ के स्थानीय लोगों से पूछा गया तो उन्होने इस किले को मांडू के राजा बाज-बहादुर का बताया । इस किले में यूं तो कोई बंद कमरे नहीं है लेकिन इसकी चारों ओर से घिरी 4 दीवारी और चौड़े प्रवेश द्वारों से पता चलता है कि यहां काफी घुड़सवार अपने घोड़ों के साथ रहा करते थे। शायद किले के पीछे मीलों दूर तक फैले जंगल के कारण भी यह स्थान घुसवारों के लिए चुना गया होगा। किले के नाम पर यहां ऐसी कोई भव्य इमारत नहीं है जितना यहां बारिश में कुदरत का मज़ा है।

 

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