मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल

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भारत का दिल मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh Tourism) समृद्ध संस्कृति और इतिहास के लिए जाना जाता है। इस राज्य का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और यहाँ के लोग इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक बनाते हैं। मध्य प्रदेश पर कई राजवंश के राजाओं ने शासन किया। मध्य प्रदेश ने प्राचीन काल के मौर्य, राष्ट्रकूट और गुप्त वंश से लेकर बुन्देल, होल्कर, मुग़ल और सिंधिया जैसे लगभग चौदह राजवंशों का उत्थान और पतन देखा है। विभिन्न राजाओं के द्वारा कला और वास्तुशैली के विभिन्न प्रकार यहाँ विकसित हुए (Madhya Pradesh Tourism 2019)। खजुराहो की कामुक मूर्तियां, ग्वालियर का शानदार किला, उज्जैन और चित्रकूट के मंदिर या ओरछा की छतरियां सभी वास्तुकला के अच्छे उदाहरण हैं। खजुराहो, सांची और भीमबेटका को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश की आदिवासी संस्कृति मध्य प्रदेश के पर्यटन (Tourism 2019) का एक महत्वपूर्ण भाग है। यहाँ मुख्य रूप से गौंड और भील आदिवासी रहते हैं। आदिवासी कला और कलाकृतियां पर्यटन के आकर्षण का प्रमुख स्त्रोत हैं। लोक संगीत और नृत्य देश की कलात्मक विरासत है। इसी क्रम में आज हम आपको बताते हैं मध्य प्रदेश के सात अजूबों के बारे में जिन्हें आपको जीवन में एकबार जरुर घूमना चाहिए।

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मांडू-

मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी है। यहाँ के खंडहर व इमारतें हमें इतिहास के उस झरोखे के दर्शन कराते हैं, जिसमें हम मांडू के शासकों की विशाल समृद्ध विरासत व शानो-शौकत से रूबरू होते हैं। कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गाँव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर गाथा (Madhya Pradesh Tourism 2019)। हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ा मांडू विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल रहा है। यहाँ के शानदार व विशाल दरवाजे मांडू प्रवेश के साथ ही इस तरह हमारा स्वागत करते हैं। मानों हमने किसी समृद्ध शासक के नगर में प्रवेश कर रहे हो।

मांडू में प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडू के बारे में जानने की तथा इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने की हमारी जिज्ञासा चरम तक पहुँच जाती है। यहाँ के विशाल इमली के पेड़ व मीठे सीताफलों से लदे पेड़ों को देखकर हमारे मुँह में पानी आना स्वभाविक है। यहाँ की कबीटनुमा स्पेशल इमली के स्वाद के चटखारे लिए बगैर भला कैसे हमारी मांडू यात्रा पूरी हो सकती है। आप भी यदि मांडू दर्शन को जा रहे हैं तो एक बार अवश्य यहाँ की इमली, सीताफल व कमलगट्टे का स्वाद चखिएगा। आइए चलते हैं मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडू की सैर पर। मांडू का दूसरा नाम मांडवगढ़ भी है


सांची-

यह प्रसिद्ध स्थान, जहां अशोक द्वारा निर्मित एक महान् स्तूप, जिनके भव्य तोरणद्वार तथा उन पर की गई जगत प्रसिद्ध मूर्तिकारी भारत की प्राचीन वास्तुकला तथा मूर्तिकला के सर्वोत्तम उदाहरणों में हैं। बौद्ध की प्रसिद्ध ऐश्वर्यशालिनी नगरी विदिशा (भीलसा) के निकट स्थित है (Madhya Pradesh Tourism 2019)। जान पड़ता है कि बौद्धकाल में साँची, महानगरी विदिशा की उपनगरी तथा विहार-स्थली थी। सर जोन मार्शल के मत में  कालिदास ने नीचगिरि नाम से जिस स्थान का वर्णन मेघदूत में विदिशा के निकट किया है, वह साँची की पहाड़ी ही है।

कहा जाता है कि अशोक ने अपनी प्रिय पत्नी देवी के कहने पर ही साँची में यह सुंदर स्तूप बनवाया था। देवी, विदिशा के एक श्रेष्ठी की पुत्री थी और अशोक ने उस समय उससे विवाह किया था जब वह अपने पिता के राज्यकाल में विदिशा का कुमारामात्य था। सांची की स्थापना बौद्ध धर्म व उसकी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में मौर्य काल के महान् राजा अशोक का सबसे बडा योगदान रहा

अपर लेक (भोपाल)-

11वीं शताब्दी में इस विशाल तालाब का निर्माण किया गया और भोपाल शहर इसके आसपास विकसित होना शुरु हुआ। इन दोनों बड़ी-छोटी झीलों को केन्द्र में रखकर भोपाल का निर्माण हुआ। भोपाल शहर के बाशिंदे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से इन दोनों से झीलों से दिल से गहराई तक जुड़े हैं। रोज़मर्रा की आम जरूरतों का पानी उन्हें इन्हीं झीलों से मिलता है, इसके अलावा आसपास के गाँवों में रहने वाले लोग इसमें कपड़े भी धोते हैं (हालांकि यह इन झीलों की सेहत के लिये खतरनाक है), सिंघाड़े की खेती भी इस तालाब में की जाती है।

स्थानीय प्रशासन की रोक और मना करने के बावजूद विभिन्न त्यौहारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ इन तालाबों में विसर्जित की जाती हैं (Madhya Pradesh Tourism 2019)। बड़े तालाब के बीच में तकिया द्वीप है जिसमें शाह अली शाह रहमतुल्लाह का मकबरा भी बना हुआ है, जो कि अभी भी धार्मिक और पुरातात्विक महत्व रखता है।

भोपाल का प्रसिद्ध बिरला मंदिर 

महेश्वर- मध्यप्रदेश राज्य के खरगौन जिले में स्थित महेश्वर एक बहुत ही शान्त कस्बा है। यह स्थान विरासत के मामले में बहुत धनी होने के साथ-साथ अपने शानदार हथकरघा वस्त्रों के लिये भी प्रसिद्ध है जिससे यहाँ के पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। यह मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक रूप से सबसे समृद्ध स्थानों में से एक है। महेश्वर में भगवान शिव के कई मन्दिर हैं और इस स्थान के नाम का शाब्दिक अर्थ भी “भगवान महेश्वर का घर” है, महेश भगवान शिव का एक अन्य नाम है। महेश्वर की विरासत की उच्च श्रेणी की अनोखी वास्तुकला से अक्सर पर्यटक आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

उज्जैन-

उज्जैन भारत में क्षिप्रा नदी के किनारे बसा मध्य प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक नगर है। यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि लिये हुआ एक प्राचीन शहर है। उज्जैन महाराजा विक्रमादित्य के शासन काल में उनके राज्य की राजधानी थी (Madhya Pradesh Tourism 2019)। इसको कालिदास की नगरी भी कहा जाता है। उज्जैन में हर 12 वर्ष के बाद ‘सिंहस्थ कुंभ’ का मेला जुड़ता है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘महाकालेश्वर’ इसी नगरी में है। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध नगर इन्दौर से यह 55 कि.मी. की दूरी पर है। उज्जैन के अन्य प्राचीन प्रचलित नाम हैं- ‘अवन्तिका’, ‘उज्जैयनी’, ‘कनकश्रन्गा’ आदि। उज्जैन मन्दिरों का नगर है। यहाँ अनेक तीर्थ स्थल है। इसकी जनसंख्या लगभग 4 से 5 लाख के लगभग है।

पचमढ़ी-

पंचमढ़ी मध्यप्रदेश का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है जिसे पंचमढ़ी कैंट के नाम से भी जाना जाता है. इसे सतपुड़ा की रानी के उपनाम से भी जाना जाता है. होशंगाबाद जिले में स्थित पंचमढ़ी 1100 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. सिंध व सतपुड़ा की सुंदर पहाड़ियों से घिरा यह पर्यटन स्थल मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है. यहां की सुंदरता भारी संख्या में पर्यटकों को लुभाती है और गर्मियों के दौरान यहां सैलानियों का तांता लगा रहता है.

 

यहां पर्यटकों को आकर्षित करने की हर चीज मौजूद है. खूबसूरत वाटरफॉल्स, शांत कलकल बहती नदी, खूबसूरत घाटियां जैसे प्रकृतिक के अद्भुत सौन्दर्य है. इसके अलावा पंचमढ़ी का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी है. मान्यता है कि पचमढ़ी या पंचमढ़ी पांडवों की पांच गुफाओं से बना है. कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान ज्यादा समय यही बिताया था.

धुआँधार प्रपात-

धुआंधार जलप्रपात जबलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का एक महत्मपूर्ण पर्यटन स्थल है। 10 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाले इस प्रपात की छटा अनुपम है। इसकी उत्पत्ति नर्मदा नदी से होती है। यह सुरम्य प्रपात प्रसिद्ध संगमरमर की चट्टानों से निकलता है। यह प्रपात जब बड़ी धारा के साथ गिरती है तो पानी के गिरने की आवाज काफी दूर से सुनाई देती है।

इस प्रपात के गिरने से उस स्थान पर कुहासा या धुंआ सा बन जाता है। इसलिए इसे धुआंधार जलप्रपात कहा जाता है। सुंदरता के लिहाज से धुआंधार जलप्रपात एक असाधारण स्थल है, जिससे पूरे साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं (Madhya Pradesh Tourism 2019)। यह जगह अपने दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए भी काफी आदर्श है। जलप्रपात के सामने काफी बड़ा खुला स्थान है। जबलपुर शहर से 25 किमी दूर स्थित यह जलप्रापत अपनी मनमोहक सुंदरता के कारण एक चर्चित पर्यटन स्थल है।

(इंटरनेट से एकत्रित की गई जानकारी )

Namdapha National Park Tourism : बाघ संरक्षित क्षेत्र नामदफा अभयारण्य

-Mradul tripathi

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