बुंदेलखंडी ओरछा

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बेतवा नदी के तट पर बसा ओरछा एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है। झांसी से 17 किमी की दूरी पर बसा यह शहर बुंदेलखंडी विरासत का धनी है। यह नगर 16वीं शताब्दी में स्थापित हुआ था। यमुना नदी की सहायक नदी बेतवा अपने आप में एक विशेष महत्व रखती है। कहते हैं इसमें स्नान मात्र से पाप धुल जाते है। इस नगर को राजा राम का शहर भी कहा जाता है। यह एकमात्र नगर है, जहां भगवान राम को भगवान की तरह नहीं बल्कि राजा की तरह पूजा जाता है। आइए जानते हैं इस नगर की विशेषता और उसके इतिहास के बारे में –

इतिहास

16वीं शताब्दी में इस सुंदर नगर की स्थापना बुंदेली राजा रूद्रप्रताप सिंह ने की थी। ओरछा का अर्थ होता है छिपा हुआ स्वर्ग और उस ज़माने में सच में ओरछा एक स्वर्ग की तरह ही था। इस नगर का नाम ‘ओरछा’ होने के पीछे एक कहानी है। कहते हैं एक बार बुंदेली के राजा रूद्रप्रताप सिंह तुंगारन के वन में शिकार करने गए, वहां उन्हें प्यास लगी। पानी की तलाश में वे तुंगू नाम के एक साधू के पास पहुंचे। साधु की कुटिया में पानी नहीं था इसलिए वे पानी लेने नदी पर गए। नदी पार करते समय उन्हें एक नाले को भी पार करना पड़ा। उस नाले को पार करते समय उनके मुंह से अचानक निकल पड़ा ‘ओहःचा’ जब साधु वापस आए, तब राजा ने साधु से वहां एक सुन्दर नगर बनाने की इच्छा ज़ाहिर की। राजा ने साधु से उस नगर का नाम सुझाव के रूप में मांगा, तब साधु ने रास्ते में मुंह से निकले शब्द राजा को बता दिए और तब इस नगर का नाम ‘ओरछा’ पड़ गया।

आइए जानते हैं इस नगर के पर्यटन स्थानों के बारे में-

जहांगीर महल

मुग़ल और बुंदेलियों की कला का मिश्रण यह महल अपने आप में एक ख़ास महत्व रखता है। यह महल बुंदेलियों और मुगलों की दोस्ती का प्रतीक माना जाता है। यह महल जहांगीर के स्वागत में राजा बीरसिंह देव ने बनवाया था। वास्तुकारी की दृष्टि से यह अपने जमाने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

रामराजा मंदिर

यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर ओरछा का सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण मंदिर है। कहते हैं कि राजा राम रोज दिन में यहीं विराजमान होते हैं और रात में मंदिर के पट बंद हो जाने के बाद वापस अयोध्या लौट जाते हैं।

राय प्रवीण महल

यह महल राजा की प्रिय संगीतकारा गणिका प्रवीणराय की याद में बनवाया गया था। कहते हैं कि राजा अकबर ने संगीतकारा की ख़ूबसूरती पर मोहित होकर उन्हें राजधानी बुलवाने का आदेश दिया था,  लेकिन राजा ने प्रवीणराय का इंद्रमणि के प्रति प्रेम देखकर उन्हें वापस ओरछा भेज दिया था।

लक्ष्मीनारायण मंदिर

इस मंदिर में झांसी की लड़ाई और कृष्ण कथा के चित्रों का वर्णन किया गया है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत है। यह मंदिर ओरछा गांव के पश्चिम में एक पहाड़ी पर बना है| यह मंदिर 1622 ई. में बीरसिंह देव द्वारा बनवाया गया था।

चतुर्भुज मंदिर

यह मंदिर चार भुजाधारी भगवान विष्णु को समर्पित है। राजा मधुकर ने इस मंदिर का निर्माण 1558 से 1573 के बीच करवाया था। यूरोपीय कैथेड्रल के समान यह मंदिर अपने समय की उत्कृष्ट रचना है|

फूलबाग

यह बाग़ बुंदेली राजा द्वारा बनवाया गया था। यह उनकी विश्राम की उत्तम जगह में से एक थी। यह बहुत ही सुंदर बाग़ है।

 

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