भारत का मिनी स्विट्जरलैंड “खज्जियार”

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खज्जियार हिमाचल प्रदेश में डलहौजी के पास स्थित एक छोटा सा शहर है जिसको भारत के मिनी स्विटजरलैंड के रूप में भी जाना जाता है। यह छोटा सा शहर यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपने जंगलों, झीलों और चरागाहों से बेहद आनंदित करता है। 6,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित अपनी प्राकृतिक सुन्दरता और लुभावने परिदृश्य के वजह से अपनी एक अलग छाप छोड़ता है। खाज्जिअर एक छोटा पठार है जिसमें एक छोटी सी झील भी है जो यहां के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है।

खज्जियार हरी घास के मैदानों और घने जंगलों से घिरा हुआ है और अपने आकर्षक मंदिरों की वजह से भी काफी प्रसिद्ध है। अगर आप खज्जियार यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो आप यहां के खास पर्यटन स्थलों के अलावा भी यहां कुछ साहसिक खेलों जैसे पैराग्लाइडिंग, घुड़सवारी, ट्रेकिंग का मजा लेकर अपनी यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

घने चीड़, देवदार और हरे घास के मैदान की पृष्ठभूमि के सामने खज्जियार पश्चिमी हिमालय के भव्य धौलाधार पर्वत की तलहटी में सुंदर रूप से बसा है। तश्तरी के आकार का खज्जियार आगंतुकों को एक विशाल और लुभावनी परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।

यह पर्यटन स्थल छोटा भले ही है, लेकिन लोकप्रियता मे बड़े-बड़े हिल स्टेशनों से कम नहीं है। इसीलिए यहाँ पहुँचने में भी कोई परेशानी नहीं होती। यहाँ के सार्वजनिक निर्माण विभाग के रेस्ट हाऊस के पास स्थित देवदार के छह समान ऊँचाई की शाखाओं वाले पेड़ों को पाँच पांडवों और छठी द्रौपदी के प्रतीकों के रूप में माना जाता है। यहाँ से एक कि.मी. की दूरी पर ‘कालटोप वन्य जीव अभ्यारण्य’ में 13 समान ऊँचाई की शाखाओं वाले एक बड़े देवदार के वृक्ष को ‘मदर ट्री’ के नाम से जाना जाता है।

यहाँ पशु-पक्षी प्रेमी सैलानियों को कई दुर्लभ जंगली जानवर और पक्षियों के दर्शन हो जाते हैं। स्विज राजदूत ने यहाँ की ख़ूबसूरती से आकर्षित होकर 7 जुलाई, 1992 को खज्जियार को हिमाचल प्रदेश का ‘मिनी स्विटजरलेंड’ की उपाधि दी थी। यहाँ आकर ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने झील के चारों ओर हरी-भरी मुलायम और आकर्षक घास की चादर बिछा रखी हो।

सड़क मार्ग से यहाँ आने के लिए चंबा या डलहौजी पहुँचने के बाद मुश्किल से आधा घंटे का समय लगता है। चंडीगढ़ से 352 और पठानकोट रेलवे स्टेशन से मात्र 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खज्जियार में ‘खज्जी नागा मंदिर’ की बड़ी मान्यता है। मंदिर के मंडप के कोनों में पाँच पांडवों की लकड़ी की मूर्तियाँ स्थापित हैं। मान्यता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान यहाँ आकर ठहरे थे। यहाँ का नजदीकी हवाई अड्डा कांगड़ा का ‘गागल’ है, जो कि 12 कि.मी. की दूरी पर और नजदीकी रेलवे स्टेशन कांगड़ा 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं। सड़क मार्ग से सीधे यहाँ पहुँचा जा सकता है।

खज्जियार झील – हिमाचल प्रदेश के चंबल जिले में स्थित खाज्जिअर लेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता की वजह से यहां देखी जाने वाली सबसे खास जगहों में से एक है। पन्ना पहाड़ियों और कपास के बादलों से घिरी यह खूबसूरत झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता से हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है। खाज्जिअर झील 1920 मीटर की विशाल ऊंचाई पर स्थित है और 5000 वर्ग गज के क्षेत्र को कवर करती है। यह झील अपने देवदार के जंगलों और छोटे जल धाराओं के दृश्यों सुशोभित है और यहां से कैलाश पर्वत की झलक भी देख सकते हैं। ‘मिनी स्विस’ के नाम फेमस खाज्जिअर पैराग्लाइडिंग और घुड़सवारी जैसे साहसिक खेलों के लिए भी प्रसिद्ध है।

कलातोप वन्यजीव अभयारण्य –कालाटॉप वन्यजीव अभयारण्य को काला टॉप खज्‍जर अभयारण्‍य के नाम से भी जाना जाता है। यह डलहौजी से 6 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह सेंचुरी हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में आती है। चारों तरफ देवदार के घने और सुरीले पेड़ लगे हुए है। पूरी सेंचुरी 1962 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैली हुई है। यहां कई प्रकार और कई किस्‍मों के वृक्ष लगे हुए है। सेंचुरी में बहुत सारे जीव-जन्‍तु भी रहते है जैसे- तेंदुआ, भालू, हिरण और गिलहरी। पर्यटक यहां आकर हिरण, लंगूर, सियार और हिमालय में पाया जाने वाला काले एक प्रकार का नेवला भी देख सकते हैं ।

खज्जियार का प्रमुख मंदिर खजजी नाग मंदिर-हिमाचल की धौलाधार पर्वत मालाओं के बीच कई नाग मंदिर हैं। इनमें खज्जियार का खजिनाग मंदिर प्रमुख है। खजिनाग मंदिर 12वीं सदी का बना हुआ है। आठ सौ साल पुराना ये मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार चंबा के राजा पृथ्वी सिंह की दाई बाटुल ने करवाया था। मंदिर के गर्भगृह में खज्जी नाग की प्रस्तर प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के प्रांगण में पंच पांडवों की काष्ठ प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पांडवों की पांच प्रतिमाएं 16वीं सदी में चंबा के राजा बलभद्र वर्मा ने स्थापित कराई थीं। काठ की बनी होने के बावजूद ये प्रतिमाएं काफी अच्छी हालत में हैं।

भगवान शिव की प्रतिमा खाज्जिअर हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी मूर्ति –खाज्जिअर से 1 किलोमीटर दूर भगवान शिव की एक 85 फीट की विशाल प्रतिमा स्थापित है जो हिमाचल प्रदेश में सबसे ऊंची है। इस मूर्ति को कांस्य में पॉलिश किया गया है जो काफी चमकती हुई दिखाई देती है। यहां स्थित एक मंदिर हर साल जून-जुलाई के महीनों में भी एक समारोह का आयोजन करता है। भगवान शिव की यह प्रतिमा बहुत आकर्षक जो सर्दियों के मौसम में बर्फ से ढकी होती है।

दर्शनीय स्थल स्वर्ण देवी मंदिर –स्वर्ण देवी मंदिर मंदिर खाज्जिअर का प्रमुख दर्शनीय स्थल है जो खाज्जिअर झील के बेहद करीब स्थित है। इस मंदिर को अपना नाम यहां लगे हुए स्वर्ण गुंबद से मिला है। इस मंदिर के पास एक गोल्फ कोर्स भी है जहां की हरियाली में आपको कई खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे।

(इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त जानकारी )

-Mradul tripathi

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