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क्या वाकई देश स्वच्छ है ?

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स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापन व प्रचार पर सरकार पैसा बहा रही है। आयोजन कर शासन-प्रशासन अपनी पीठ खुद ठोक रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि किसी ने पुरस्कार बांटने के बाद पलटकर नहीं देखा कि जिन शहरों को पुरस्कार’ से नवाजा गया है, उनके सूरते-हाल अब क्या है। इस मुद्दे पर कार्टूनिस्ट का नज़रिया|

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