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भावनाओं से खेलना इनसे सीखें…

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विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही नेताओं ने वादे करने शुरू कर दी हैं| ये जनता की भावनाओं से खेलकर झूठे वादे करते हैं|  की| राजनीतिक दलों के वादे और उनके काम के बीच फ़ासला लगातार बढ़ रहा है| इससे आम लोगों में निराशा बढ़ रही है| राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता अपने निचले पायदान पर पहुंच चुकी है|पिछले दिनों सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा था कि भावनाएं जिताती हैं न कि विकास|  इस मुद्दे पर कार्टूनिस्ट का नज़रिया|

सब एक थैली के चट्टे-बट्टे…

सियासी मुद्दों को रखें याद…

राजनीति के कीचड़ से सभी गंदे…

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