उपद्रव की कीमत

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भरा नहीं जो भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं| हृदय नहीं वो पत्थर हैं, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं|| आज देश मैथिलिशरण गुप्त की इन पंक्तियों को समर्पित होने वाले युवाओं की तलाश में है| कश्मीर में जिन युवाओं के हाथ में लैपटॉप होना चाहिए, उनके हाथ में आज पत्थर है| इन युवाओं के भविष्य की कीमत भी जिस तरह से तय की गई है, वह उनके जमीर से कहीं कम है, लेकिन बावजूद इसके हिंसा पर उतारू कश्मीरी युवा आज इस राह पर आगे बढ़ रहे हैं|

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