दरिंदों के हाथों में कैद मासूमियत

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पिछले कुछ अर्से से न केवल देश बल्कि प्रदेशभर में दुष्कर्मों से जुड़े समाचारों की बाढ़ सी आ गई है। यह चिंता का विषय है। चिंता का विषय इसलिए है कि इस दुष्प्रवृत्ति ने हमारी भारतीय संस्कृति के महान मूल्यों पर चोट पहुंचानी शुरू कर दी है। भले ही दुष्कर्माें को रोकने के लिए सरकार ने कठोरतम कानून बना दिए, लेकिन आज भी मासूमियत दरिंदों के हाथों में क़ैद हैं| इस मुद्दे पर कार्टूनिस्ट का नज़रिया|

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