मन की बात के बाद मन का इतिहास

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प्रधानमंत्री गुरुवार को उत्तरप्रदेश के मगहर पहुंचे थे, जहां उनसे चूक हो गई| वहां प्रधानमंत्री ने संबोधन में कहा, “समाज को सदियों से दिशा दे रहे मार्गदर्शक, समभाव और समरसता के प्रतिबिम्ब महात्मा कबीर को उनकी ही निर्वाण भूमि से एक बार फिर मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं| ऐसा कहते हैं कि यहीं पर संत कबीर, गुरु नानकदेव और बाबा गोरखनाथ ने एक साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा की थी|”जबकि तीनों महापुरुषों का जन्म अलग-अलग काल में हुआ था| इस मुद्दे  पर कार्टूनिस्ट का नजरिया|

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