हिंदुस्तान में ही पिछड़ गई हिन्दी

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हम हिंदुस्तानी है और हिन्दी हमारी मातृभाषा है, लेकिन अब ये केवल सुनने और पढ़ने में ही अच्छा लगता है। हिन्दी अब हिन्दुस्तानी नहीं रही। नई पीढ़ी तो हिन्दी का ऐसा अपमान करती है जैसे वे हिन्दुस्तानी नहीं बल्कि और कहीं के निवासी हो। हमारे देश में हिन्दी बोलने वालों को गवार और अंग्रेजी बोलने वालों को होशियार कहा जाता है! हिन्दी दिवस की शुभकमनाएं….

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