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नेताओं ने सिर्फ खाया, अब समझ में आया…

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‘खाया-पीया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना’ यह कहावत भारत की जनता पर पूरी तरह लागू होती है| कुछ दिनों पहले खबर आई है कि भाजपा विधानसभा चुनाव जनता के पैसों से लड़ेगी| यानी जनता को कुछ मिला तो नहीं परंतु उसे देना ज़रूर पड़ेगा| इस मुद्दे पर कार्टूनिस्ट का नज़रिया|

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