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मारुती कंपनी की लापरवाही, लगा 1 लाख का जुर्माना

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आज के दौर में वाहन निर्माता कंपनियां अपनी कार में बेहतर से बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि कभी-कभी वाहन खरीदने के बाद उसमें कई समस्याएं आ जाती हैं जिसका निराकरण वाहन निर्माता कम्पनी करती है। लेकिन जब कम्पनी इस बात से मुकर जाए तो फिर उपभोक्ता को उपभोक्ता फोरम का सहारा लेना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला हैदराबाद से सामने आया है जहां एक उपभोक्ता को कार में समस्या आने के बाद उसने जिला उपभोक्ता फोरम में वाहन निर्माता कम्पनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। जिला उपभोक्ता फोरम ने कम्पनी पर और साथ ही डीलर पर जुर्माना लगाया। जिला उपभोक्ता फोरम ने कम्पनी को तत्काल ही ग्राहक को मुआवजे के तौर पर 1 लाख रुपए देने का आदेश दे डाला।

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दरअसल मामला हैदराबाद का है जहां के रहने वाले सुदर्शन रेड्डी साल 2014 में मारुति के डीलर वरुण मोटर्स से मारुती आल्टो खरीदी थी। लेकिन कार खरीदने के मात्र 6 माह बाद ही उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। कार के इंजन से आवाज आने के अलावा उनकी कार का हॉर्न, पीछे के दरवाजे का लॉक लीवर खराब हो गया। और तो और उनकी कार की फ्रंट विंडशील्ड में भी क्रैक आ गया। इस बात की शिकायत रेड्डी ने तत्काल शोरूम पर की और फिर अधिकृत सर्विस सेंटर पर जाकर इन समस्याओं को बताया। रेड्डी की शिकायत पर भी कंपनी ने कार का हॉर्न नहीं बदला बल्कि पुराने हॉर्न को ही ठीक कर के दिया।

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जब रेड्डी कार ठीक करवा कर अगले दिन अपने दफ्तर जाने के लिए निकले तभी उनकी कार के इंजन से दोबारा आवाज आणि शुरू हो गई और हॉर्न भी ख़राब हो गया। इस बात को लेकर उन्होंने फिर से वरुण मोटर्स से सम्पर्क किया। लेकिन जब कम्पनी और डीलर दोनों ही उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सके तो मजबूरी में उन्हें उपभोक्ता फोरम की शरण में जाना पड़ा। रेड्डी ने अपनी शिकायत में दावा किया कि उनकी कार का हॉर्न ख़राब हो जाने की वजह से उन्हें कार को बेहद ही धीमी रफ़्तार से चलना पड़ता था। जिस वजह से उन्हें आने-जाने में तो देरी होती ही थी और कार का माइलेज भी बेहद कम मिलता था। इसी वजह से रेड्डी ने शिकायत दर्ज करवा कर मुआवजे की मांग की।

वहीं अदालत में कंपनी के प्रतिनिधि ने जवाब में कहा कि रेड्डी द्वारा सिर्फ हॉर्न ख़राब होने की जानकरी दी गई थी। उनका कहना है कि रेड्डी ने होने के बिलकुल भी काम न करने की कोई भी शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी। उन्होंने कहा कि रेड्डी की शिकायत पर हॉर्न को एडजस्ट कर दिया गया था और उनकी गाड़ी को भी पूरी तरह से ठीक करके दिया गया था। प्रतिनिधि ने कहा कि शिकायतकर्ता ने जो दावा किया है वह बेबुनियाद है कि खराब हॉर्न की वजह से दुर्घटना हुई। वहीं डीलर वरुण मोटर्स ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ना चाहा कि वांरटी पीरियड में केवल सर्विस देने के लिए वह जिम्मेदार है। इसके अलावा उसकी कोई गलती नहीं।

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इस पूरे मामले में उपभोक्ता फोरम ने अदालत में कहा कि हैदाराबाद के ट्रैफिक में हॉर्न न होने से दुर्घटनाओं की संभावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं। लेकिन यदि वाहन में हॉर्न हो और सही तरीके से कार्य करे तो भारी ट्रैफिक में भी आसानी से निकला जा सकता है और दुर्घटना से भी बचा जा सकता है। इसलिए कम्पनी का यह कहना कि हॉर्न दुर्घटनाओं का जिम्मेदार नहीं है, सरासर गलत है।

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