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मोबाइल के बाद अब ऑटोमोबाइल क्षेत्र में होगा चीनी कंपनियों का राज

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भारतीय बाजार में चीनी कंपनियां तेजी से अपने पैर जमाते जा रही हैं। सबसे पहले स्मार्टफोन निर्माता कंपनी शाओमी ने अपने Mi3 स्मार्टफोन के साथ भारतीय बाजार में कदम रखा था। इसके बाद ओप्पो और वीवो जैसी चायनीज कंपनियों ने भारत के बाजारों में अपना कदम रखा। महज़ 5 सालों के अंदर ही चायनीज कंनियों ने देश के 78% स्मार्टफोन बाजार पर अपना एक क्षेत्र कब्ज़ा जमा लिया। अब चायनीज कंपनियां स्मार्टफोन सेक्टर से निकलकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अपना कदम बढ़ा रही हैं।

चायनीज कंपनियों के आ जाने के बाद से स्वदेशी कंपनियां जैसे कार्बन, माइक्रोमैक्स और लावा का जैसे नामोनिशान सा ही मिट गया। इतना ही नहीं इन चायनीज कंपनियों ने सैमसंग और नोकिआ जैसे बड़ी कंपनियों को भी जबरदस्त टक्कट दी। इन नामी-गिरामी कंपनियों के शेयर 20 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गए थे। अब यह चायनीज कंपनियां ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी अपना वर्चस्व कायम करने पर विचार कर रही हैं।

गौरतलब है कि पिछले 3 से 4 सालों के अंदर तकरीबन 1 दर्जन से भी ज्यादा ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भारतीय बाजार में अपना कदम रखा है। कुछ चायनीज कंपनियों ने जहां मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी के साथ खुद के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर खोले हैं, वहीं कुछ कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। यह सभी चायनीज कंपनियां भारतीय बाजार में अपने ई-स्कूटर्स, ई-बाइक्स, इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स, पेट्रोल बाइक्स, एसयूवी, लग्जरी कारें, बसें-ट्रक मतलब कि सभी प्रकार के वाहन पेश कर रही हैं।

देश के इलेक्ट्रिक बाजार पर चायनीज कंपनियां अपना कब्ज़ा जमाने की तैयारी में हैं क्योंकि भारत सरकार आगामी 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार कर चुकी है। भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात जाए तो वह अभी इलेक्ट्रिक कारों की टेक्नोलॉजी में काफी कमजोर है और इसके लिए वह बाहरी कंपनियों पर आश्रित है। इसी चीज़ का फायदा उठाते हुए चायनीज कंपनियां तेजी से अपने पैर भारतीय बाजार में जमा रही हैं।

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