हमें मिलकर लानी होगी क्रांति

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कुछ दिन पहले एक पार्टी में गया था। वहां खाने में पत्तागोभी की सब्जी थी, लेकिन मैंने देखा कि मेरे कई मित्र इस सब्जी को लेने से बच रहे हैं। मुझे यह सब्जी बेहद पसंद आई इसलिए मैंने जानने की कोशिश की कि बाकी लोग इससे दूरी क्यों बना रहे हैं? इसका जो जवाब उन सबने दिया, उससे मैं सोचने पर मजबूर हो गया।

उनका कहना था कि पत्तागोभी में एक कीड़ा होता है, जो कहीं भी घुस जाता है। वह आंखों में भी चला जाता है और बहुत नुकसान पहुंचाता है। मैंने पूछा, तुम लोगों में से कितनों ने वह कीड़ा असलियत में देखा है?  वे बोले, असल जिंदगी में तो कभी नहीं देखा, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस कीड़े वाले वीडियो को जरूर देखा है इसलिए पत्तागोभी खाना बंद कर दी।

आज के ज़माने में सोशल मीडिया पर कोई खबर या अफवाह तेजी से फैलने की वजह है लोगों द्वारा सच्चाई जाने बिना खबर या वीडियो को आगे प्रेषित करने की मनोवृत्ति। कोई बच्चा एक बार गुम जाए तो लोग उसकी तस्वीर को यह सोचकर हर ग्रुप में प्रेषित करते हैं मानो कोई बहुत पुण्य का काम कर रहे हों। यह बात दीगर है कि बच्चा मिलने के सालों बाद भी यह मैसेज पृथ्वी के चक्कर अनंतकाल तक लगाता रहता है। इन सबके बीच उन लोगों को तो पागलखाने भेज देना चाहिए, जो किसी मरीज की तस्वीर शेयर करने को कहते हैं और यह दावा करते हैं कि फेसबुक हर शेयर के बदले 1 रुपया या फिर 1$ इस मरीज को इलाज के लिए देगा।

फेसबुक को यही काम बचा है क्या अब कि लोगों का इलाज करवाए? वैसे ज़ुकेरबर्ग को यह पैसे देने तो चाहिए, लेकिन उस मरीज की जगह इस मैसेज को आगे भेजने वालों के दिमागी इलाज के लिए। दुनिया चांद पर पहुंच गई, लेकिन भारत के युवा किसी फ़ोटू के कमेंट में 9 लिखकर जादू देखने का इंतजार कर रहे हैं। अब इनसे पकौड़े तलने को नहीं कहें तो क्या नासा में वैज्ञानिक बनने का कहें?

कोई एंजेल प्रिया नाम की सफा फर्जी आईडी एक फर्जी तस्वीर डालकर पूछ लेती है कि “दोस्तों, मैं कैसी लग रही हूं?” तो कमेंट में लाखों बेरोजगार उसकी खूबसूरती की तारीफ में ऐसी-ऐसी शायरी चेप देते हैं कि मिर्ज़ा ग़ालिब भी शर्मा जाएं। लड़कियों की तस्वीर पर ‘नाइस पिक’ लिखने से देश के युवा को फुर्सत मिले तब तो वह कुछ करने की सोचे।

कुछ वक्त पहले एक लड़के ने एक आईडी बनाई थी ‘अदिति गुप्ता’ के फर्जी नाम से और लोगों को ब्लैकमेल करना शुरू किया। कुछ समझदार लोगों ने पुलिस में इसकी शिकायत की, तब आईपी एड्रेस से उसकी गिरफ्तारी हुई। उसके बाद पता चला कि उसकी फर्जी तस्वीर और चैटिंग के दीवाने कितने ही लड़के उसके एकाउंट में हज़ारों रुपए जमा करवाकर ठगी का शिकार हो चुके हैं। वाकई हद होती है बेवकूफी की भी।

दुनिया के जाने किस भाग में संतरे के आकार के ओले गिरते हैं और हम उस वीडियो में कभी भोपाल तो कभी फैजाबाद का नाम जोड़कर आगे भेजते रहते हैं। कुछ खुराफाती लोग इसमें जो मन में आए शहर का नाम जोड़ते रहते हैं और वीडियो चलता रहता है। कुछ वीडियो ऐसे हैरान करने वाले दावे करते हैं कि देखकर आपका दिमाग ही घूम जाएगा। पेट के कीड़ों को नूडल्स बताने वाले वीडियो हो या पत्तागोभी में पाए जाने वाले फर्जी कीड़े की बात हो, हम सभी बातों पर ऐसे यकीन करने लगे हैं, जैसे यह सब कोई ब्रह्मवाक्य हो। हमारे देश के लोग इतने सालों से पत्तागोभी खा रहे हैं| किसी ने तो उस कीड़े को देखा होता, लेकिन बस एक वीडियो देखा और गोभी खाना बंद।

कल को विदेशी या फिर खुराफाती ताकतें किसी फल की कीमतें गिरवाना चाहेंगे तो उस फल के कीड़े का कोई फर्जी वीडियो वायरल कर देंगे और हम बिना सोचे-समझे उस फल को खाना बंद करके किसानों का दम निकाल देंगे। सोशल मीडिया अब इतना ताकतवर हो चुका है कि यह आपकी खानपान की आदतों से लेकर दिनचर्या तक को सीधे प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया से ही अब ‘भारत बंद’ भी हो रहे हैं तो यह अब हमारे लिए सोचने की घड़ी है।

सोशल मीडिया की हालत अब ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ वाली हो गई है। सभी के हाथ में मोबाइल है, व्हाट्सएप के ढेरों ग्रुप हैं चाहे जो लिखकर या तस्वीरें खींचकर आगे प्रेषित कर सकते हैं। ये नई-नई ताकत जो लोगों के साथ में आई है, इसका सदुपयोग कम दुरुपयोग अधिक हो रहा है। हमें कोई भी संदेश,तस्वीर या फिर वीडियो किसी को आगे भेजने से पहले दो मिनट रुककर सोचना पड़ेगा कि इसका समाज पर क्या असर होगा? यह नई क्रांति भी हमें और आपको मिलकर लानी होगी नहीं तो देश को तोड़ने का सपना देखने वाली ताकतों का हम अनजाने में ही मोहरा बनते रहेंगे।

-सचिन पौराणिक

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