“इंसाफ दिलाना है तो धारा 370 हटाना है”

0

जब भी पाकिस्तान द्वारा की गई गोलीबारी में हमारे सैनिक शहीद होते हैं तो इसके विरोध में आवाज़ उठती है कि पाकिस्तान का स्थायी इलाज किया जाए। फिर सेना मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाक में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर देती है, लेकिन तब कहीं से आवाज़ आती है कि इससे क्या होगा? वे 2 मारेंगे, आप 4 मार देंगे, ऐसा कब तक चलेगा? ऐसे ही जब देश में बच्चियों से दुष्कर्म पर चर्चा चली कि कानून ही कमजोर है तो सरकार ने पॉक्सो कानून में संशोधन कर फांसी का प्रावधान कर दिया। इसका भी विरोध यह कहकर हो रहा है कि ऐसा करने से बलात्कार नहीं रुक जाएंगे। सोचने लायक बात यह है कि ऐसे दोहरे चरित्र से हम समाज में क्या संदेश देना चाहते हैं?

वृंदा करात जैसे नेता दुष्कर्मियों को फांसी की सजा का खुलेआम विरोध कर रहे हैं तो कई दूसरे नेता उनकी बातों से सहमति जता रहे हैं। कोई दुष्कर्म पीड़िता यह बयान सुनती होगी तो क्या बीतती होगी उस पर? हमारा समाज कितना संवेदनाहीन हो चुका है कि बच्चियों के गुनहगारों से हमें हमदर्दी है, लेकिन कोई कसूर न होने पर भी जिस बच्ची की आत्मा छलनी हो गई, उसकी हमें परवाह तक नहीं। आसिफा के केस में स्वरा भास्कर और करीना कपूर जैसी अभिनेत्रियां हाथों में तख्ती लेकर ‘देवीस्थान’  पर कीचड़ उछालते नज़र आईं, वहीं प्रियंका वाड्रा (वैसे साड़ी में आते ही वो गांधी बन जाती है) रात को 12 बजे मोमबत्ती मार्च निकालती दिखीं, लेकिन गाज़ीपुर की गीता के लिए इनमें से किसी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। यह क्या दर्शाता है?

कुछ दिनों पहले तक दुष्कर्म के मुद्दे पर अनशन पर बैठने वाली दिल्ली महिला बोर्ड की स्वाति मालीवाल को दिल्ली में बच्ची के साथ मदरसे के मौलवी द्वारा किए दुष्कर्म पर बयान देते नहीं बन रहा है, क्यों? उन्नाव से लेकर कठुआ मामलों में अपना विरोध जताने वाले केजरीवाल खुद के राज्य दिल्ली में हुई घटना पर चुप क्यों है? केजरीवालजी! थोड़ी शर्म बची है आपमें या सत्ता की मलाई खाकर आप भी संवेदनाशून्य हो चुके हैं? क्या ऐसा नहीं लगता आपको कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में भी ये नेता धर्म-मजहब ढूंढ रहे हैं?

ऐसे दोहरे रवैये को लेकर चलने वाले नेता, अभिनेता और तथाकथित बुद्धिजीवी हमारे समाज में सम्मान पाएंगे तो महिला सुरक्षा की बातें ‘दूर की कौड़ी’ ही नज़र आएंगी। जिस आसिफा के नाम पर इतना हंगामा मचा, चंदा इकट्ठा हुआ, कानून में बदलाव तक हो गया, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आसिफा के गुनहगारों पर यह नया कानून काम करेगा ही नहीं। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 लागू होने की वजह से पॉक्सो कानून का यह फांसी वाला संशोधन वहां संवैधानिक तौर पर लागू किया ही नहीं जा सकता है। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने की ये भी एक कीमत है, जो देश को चुकानी पड़ रही है।

अब आखिर में एक सवाल आसिफा के लिए न्याय मांगने वालों से है कि यदि वे सच में ही चाहते हैं कि आसिफा के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो तो क्या आप धारा 370  हटाने के लिए अभियान चलाने को तैयार हैं? क्या स्वरा भास्कर और करीना कपूर जैसी अभिनेत्रियां हाथों में वैसी ही तख्ती लेकर जम्मू कश्मीर को मिले इस विशेष दर्जे के खिलाफ मोर्चा खोलेंगी? क्या प्रियंका वाड्रा और कांग्रेस धारा 370 हटाने के लिए आधी रात को एक बार फिर मोमबत्तियां लेकर निकलेंगी? आसिफा हो या गीता सभी बच्चियों को इंसाफ मिले, बलात्कारियों को जल्द फांसी दी जाए, यह हमारा स्टैंड है, लेकिन एजेंडे के तहत किसी मुद्दे को उठाने वालों को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए।

यदि आसिफा को सच में न्याय दिलाना है तो धारा 370 हटाना है। अब यदि ये विभूतियां इस मुद्दे पर पुनः मौन धारण कर लेती हैं तो जनता को समझना चाहिए कि इनका विरोध सिर्फ एक एजेंडे के तहत है। आसिफा उनके लिए सिर्फ एक बहाना है अपने पूर्व निर्धारित एजेंडे को आगे बढ़ाने का। आसिफा सहित जम्मू-कश्मीर की सभी पीड़ित बच्चियों को न्याय मिले, इसके लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे। दोहरे चरित्र को लेकर चलने वाले ऐसे व्यक्तियों को बेपर्दा किए बिना यह नहीं हो सकेगा।

-सचिन पौराणिक

Share.