स्वविवेक से सोच-समझकर ही निर्णय लें

0

बड़े-बुजुर्ग कहते आए हैं कि किसी के बहकावे में आकर कोई काम नहीं करना चाहिए। हमेशा स्वविवेक से सोच-समझकर ही निर्णय करना चाहिए। बिना सोचे-समझे या भावनाओं में बहकर कोई काम किया जाता है तो उसका अंजाम भी खुद को ही भुगतना पड़ता है। लगभग 20 साल पहले ‘हम साथ-साथ हैं’ फ़िल्म की शूटिंग के दौरान हिरण के शिकार के जिस मामले में सलमान खान सहित कई साथी कलाकार लगातार कोर्ट के चक्कर काट रहे थे, उसका फैसला आज आखिरकार आ ही गया।

इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि हिरण काला हो या सुनहरा, त्रेता युग हो या कलियुग, उसको मारने वाला कभी चैन से नहीं बैठ सकता है। त्रेतायुग में रामजी ने हिरण का शिकार किया था तो उन्हें पत्नी-वियोग झेलने के साथ ही रावण से युद्ध भी करना पड़ा। कलियुग में सलमान खान ने हिरण मारा और वे भी हिरण के फेर में उलझते नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने सलमान को दोषी मान लिया है, लेकिन साथी कलाकारों को सबूतों की कमी का हवाला देकर बरी कर दिया गया है। कोर्ट के इस फैसले को मुख्यतः दो नजरियों से देखा जा सकता है।

पहला यह कि भारतीय न्याय व्यवस्था इतनी मजबूत है कि कोई कितनी ही बड़ी शख्सियत हो, कानून से बढ़कर नहीं है। कानून के सामने सभी समान है और आपका रसूख न्याय व्यवस्था को प्रभावित नहीं कर सकता। एक मूक पशु को मारने पर भी कानून अपना काम अच्छे से करता है। दूसरा पक्ष यह है कि सलमान ने हिरण को मारा या नहीं मारा, यह पता करने में भारत की न्यायपालिका को 20 साल लग गए है, क्या यह हमारी न्याय प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़े नहीं करता है? हिरण सलमान की गोली से बच भी गया होता, तब भी उसके जिंदा रहते उसको इंसाफ मिलना मुमकिन था? हिरण को इन्साफ मिलने में 20 साल लग रहे हैं| इन्सान को न्याय कितने सालों में मिल सकता है?

सलमान ने गलत किया तो उन्हें इसकी सजा बिल्कुल मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें सिर्फ इसलिए भी सजा नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे एक बड़ी शख्सियत हैं। सलमान को सजा जरूर दीजिए, लेकिन इन सवालों का जवाब भी दीजिए कि हिरण सहित अन्य संरक्षित प्रजाति के जानवरों का शिकार बंद हो गया है क्या? क्या सभी अवैध शिकारियों को भी ऐसे ही सजा दी जा रही है? विश्नोई समाज ने सलमान के अलावा कितने शिकारियों पर केस दर्ज करवाया है?

पुनः बड़े-बुजुर्गों की बात यदि सलमान समझ जाते तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ता। जिनके भड़काने पर उन्होंने गोली चलाई, वे सब बरी कर दिए गए हैं। अब परेशानी में सिर्फ सलमान ही हैं। सलमान बेशक अच्छे इन्सान हैं, सेवा के कई कार्य भी उनकी संस्था करती है, लेकिन अच्छे इन्सान भी आखिर हैं तो कानून के दायरे के भीतर ही। सलमान को आगे से यह ध्यान रखना पड़ेगा कि किसी के कहने में न आएं नहीं तो उनकी मुसीबतें खत्म होने के बजाय बढ़ती ही चली जाएंगी|

-सचिन पौराणिक

Share.