विरोधी विचारधारा के बीच भी बातचीत की गुंजाइश

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जिस प्रकार भारत के हिन्दी समाचार चैनल हर सप्ताहांत उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को लेकर विशेष कार्यक्रम किया करते हैं, उसे देखकर यह चुटकुला सोशल मीडिया पर चल रहा है कि किम जोंग खुद अपने अगले कदम को जानने के लिए भारत के न्यूज़ चैनल देखते हैं। सच भी है, हर शनिवार और रविवार रात तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक को लेकर हर चैनल पर किम जोंग और उनके खतरनाक मंसूबे दिखाई दे जाते हैं।

झगड़े चाहे दो पड़ोसियों के बीच हो, दो परिवारों के बीच हो या दो देशों के बीच, उनका हल सिर्फ बातचीत द्वारा ही निकाला जा सकता है, यह एक बार फिर सिद्ध हो गया है। किम जोंग उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात भारतीय समयानुसार आज सुबह सिंगापुर में हुई। ट्रम्प और किम दोनों ने ही इस मुलाकात को सकारात्मक और उम्मीदों से भरी बताया।

सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप पर हुई इस बैठक के लिए पिछले कई दिनों से अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। सिंगापुर की पुलिस के अलावा वहां की विशेष प्रशिक्षित गोरखा ब्रिगेड और किम की सुरक्षा के लिए उत्तर कोरिया के सबसे जांबाज़ जवानों का दल और चीन के खुफिया जासूस भी सिंगापुर में डेरा डाले हुए थे। अमरीकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के बारे में सब जानते ही हैं। दोनों देशों के प्रमुखों के लिए कई स्तरों पर बनाई गई सुरक्षा व्यवस्था के ऐसे उदाहरण दुनिया में कम ही देखने को मिलते हैं।

इस मुलाकात के पहले दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका था और नौबत एक-दूसरे पर परमाणु हमले तक की आ गई थी। ट्रम्प के लिए इस मुलाकात के मायने इसलिए भी बेहद ज्यादा थे, क्योंकि पेरिस जलवायु समझौते के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वे अलग-थलग पड़ चुके थे। ऐसे में उन्होंने किम से मुलाकात का बड़ा दांव खेला क्योंकि यह मुलाकात ट्रम्प के लिए अग्निपरीक्षा थी तो किम के पास खोने को कुछ नहीं था। हालांकि दोनों के बीच बातचीत सफल रहने का एक कारण यह रहा कि दोनों ही देश हर बात खुलकर कहने में करते हैं। इस मुलाकात के बाद कइयों को लग सकता है कि हमें भी अपने पड़ोसी पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करना चाहिए, लेकिन यह बातचीत इसलिए कभी सफल नही हो सकती क्योंकि पाक एक दोगला और एहसानफरामोश मुल्क है।

तमाम अटकलों के बीच जिस सद्भावनापूर्ण माहौल में यह मुलाकात हुई, उससे दुनिया में एक सकारात्मक माहौल बना है और यह संदेश गया है कि विरोधी विचारधारा के बीच भी बातचीत की गुंजाइश हमेशा रहती है। इस मुलाकात के बाद अब उत्तर कोरिया के तानाशाह की स्वीकार्यता दुनिया में बढ़ेगी और सिंगापुर के बाद हो सकता है कि वे और देशों की यात्रा करें। ट्रम्प भी यदि किम को परमाणु हथियारों पर लगाम लगाने के लिए राज़ी कर पाते हैं तो यह उनकी निजी उपलब्धि होगी। जो काम ओबामा और बुश नहीं कर पाए, वह काम ट्रम्प के हाथों होना अमरीका की घरेलू राजनीति में भी उनका कद बढ़ाएगी।

आज के बाद भारतीय समाचार चैनलों से भी उम्मीद की जाएगी कि तीसरे विश्वयुद्ध और किम जोंग की खबरों को दिखा-दिखाकर वे दर्शकों पर और अत्याचार नहीं करेंगे और कुछ सकारात्मक खबर दिखाना शुरू करेंगे।

-सचिन पौराणिक

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