Talented View : अल्पसंख्यक का दर्द

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पाकिस्तान (Cartoon On Minorities Of Pakistan) में रह रहे अल्पसंख्यकों के लिए ये मुल्क कितना बड़ा ‘नर्क’ बन चुका है इसका खुलासा क्रिकेटर शोएब अख्तर ने कर दिया है। पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करने वाले उनके बयान से फिर ये साफ हुआ है कि पाकिस्तान में मुस्लिमों को छोड़कर अन्य धर्मावलम्बियों को किस तरह प्रताड़ित किया जाता है। अल्पसंख्यक पाकिस्तान में कितनी दहशत में जीने को मज़बूर है इसका पता दानिश कनेरिया के वीडियो को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।

Today Cartoon : देखने के लिए चाहिए अलग नज़र

शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) द्वारा उनके लिए आवाज़ उठाने के बाद भी कनेरिया खुलकर अपने साथ हुए अन्याय पर नही बोल पा रहे है। उनके वीडियो (Cartoon On Minorities Of Pakistan) में उनका दर्द तो छलक ही रहा था लेकिन साथ ही ‘डर’ भी उनकी आंखों से झांक रहा था। शोएब द्वारा उनकी बात रखने के बावजूद दानिश किसी पर सीधे आरोप लगाने से बचते दिखे। उन्होंने अपने साथ भेदभाव और दुर्भावना रखने वाले किसी खिलाड़ी का नाम तक नही लिया। कनेरिया का ये ‘डर’ इसकी पुष्टि कर रहा था अगर उन्होंने आवाज़ बुलंद करने की कोशिश की तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती है।

Today Cartoon : फिर गुलाम

ये हाल है पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अंतरराष्ट्रीय खिलाडियों का। आम अवाम के साथ क्या होता होगा इसका सहज अंदाज़ लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ भारत है। हमारे यहां मोहम्मद अजहरुद्दीन लगभग 1 दशक तक भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे। लेकिन एक बार उन पर फिक्सिंग आरोप लगे तो उन्होंने इसके लिए सीधे-सीधे खुद को अल्पसंख्यक होने की वजह से निशाना बनाये जाने का आरोप लगा दिया। लेकिन अगर सच मे उनके साथ भेदभाव होता तो क्या वो कभी भारत के कप्तान बन पाते?

भारत के तथाकथित अल्पसंख्यक (Cartoon On Minorities Of Pakistan)  जो जुम्मे की नमाज़ के बाद शहर को आग लगा रहे है उन्हें दानिश कनेरिया प्रकरण पर नज़र डालना चाहिये। भारत सभी धर्म के लोगों को खुले दिल से गले लगा रहा है उसके बाद भी कुछ लोगों को असहिष्णुता यहीं नज़र आती है। लेकिन पड़ोसी देश के अल्पसंख्यको की चिंता कोई करता नजर नही आता। नागरिकता संसोधन कानून में हिन्दू, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसियों को नागरिकता दी जा रही है वो बहुत समझदारी भरा कदम है। क्योंकि मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिमो को हमेशा कमतर दर्जे का नागरिक माना जाता है और उनका सदा शोषण किया जाता है।

एक यूसुफ योहाना (Yusuf Yohan) नाम के ईसाई बल्लेबाज भी थे पाकिस्तान की टीम में। उनके साथ भी भेदभाव इतना बढ़ गया, प्रताड़ना इतनी बढ़ गयी कि आखिरकार उन्हें इस्लाम अपनाकर अपना नाम मोहम्मद यूसुफ र(Mohammad Yusuf) खना पड़ गया। कनेरिया पर भी निश्चित ऐसा दबाव बनाया गया होगा। लेकिन चूंकि वो दबाव में नही झुके और हिन्दू बने रहे इसलिए उनका केरियर खत्म करवा दिया गया। इन सबके पीछे वजह ये रही कि पाकिस्तान की क्रिकेट टीम पर मजहब का रंग इतना गाड़ा चढ़ गया कि वो जेंटलमैन गेम कहलाने वाले खेल की गरिमा को बरकरार न रख सके। (Cartoon On Minorities Of Pakistan)

लेकिन यही पाकिस्तान जब हमारे नागरिकता कानून (CAA) पर सवाल खड़े करता है तो ऐसा लगता है कि कीचड़ में लौटता हुआ कोई जानवर हमें बतला रहा है कि हमारे शर्ट पर एक धब्बा है। इमरान खान नियाज़ी को आरएसएस, मोदी, भाजपा और हिंदुस्तान की फिक्र करने से पहले अपने देश के अल्पसंख्यकों की फिक्र करना चाहिये। और हमारे मुस्लिम भाइयों को भी एनआरसी की चिंता छोड़कर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। आप गाजापट्टी में हो रहे अत्याचार के खिलाफ जुलूस निकाल सकते हो तो पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए भी आपको आवाज़ उठानी ही चाहिये। (Cartoon On Minorities Of Pakistan)

Today Cartoon : चल भाग यहां से

Prabhat Jain

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