Talented View : पारिवारिक सरकार

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महाराष्ट्र में खिचड़ी सरकार बनने के करीब एक महीने बाद प्रदेश को मंत्रिमंडल मिल सका। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना- एनसीपी- कांग्रेस की सरकार ने कल आखिरकार मंत्रमंडल विस्तार कर ही लिया। सभी दलों को सरकार में हिस्सेदारी देने की मजबूरी और पार्टियों के आंतरिक विवादों के चलते ये विस्तार इतना लम्बित हो गया था। ( talented views on maharashtra ) गठबंधन की सरकार चलाने की कई मज़बूरियों में ये समस्या बुनियादी है।

महाराष्ट्र के मंत्रीमंडल विस्तार को देखकर पहली बात जो समझ आयी कि ये मंत्रीमंडल कम और बेटी-बेटा-भतीजा मंडल ज्यादा है। नेताओं ने अपने सम्बन्धियों को मंत्रीपद दिलवाने के लिये पुरजोर कोशिशें की और वो उसमें कामयाब भी रहे। शिवसेना से पहली बार विधायक बने आदित्य ठाकरे को कैबिनेट में जगह मिल गयी है। पिताजी अगर मुख्यमंत्री है तो बेटे को मंत्री बनने से भला कौन रोक सकता है। सहयोगी कांग्रेस-एनसीपी ने भी इसमें कोई ऐतराज नही जताया क्योंकि वो खुद भी कहाँ इससे अलग है?

Talented View : सोच की गंदगी

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार राज्य के उपमुख्यमंत्री बनने जा रहे है। वो रिकॉर्ड चौथी बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बनेंगे। इसके अलावा भाजपा नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय जो एनसीपी से चुनाव जीतकर आये है उन्हे भी मंत्रीपद मिल चुका है। धनन्जय अपनी बहन पंकजा मुंडे को चुनाव हराकर विधायक बने है। ( talented views on maharashtra ) कांग्रेस की बात करें तो हालात वहां भी अलग नही है।

Talented View : अल्पसंख्यक का दर्द

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के साथ ही स्वर्गीय विलासराव देशमुख के बेटे अनिल देशमुख ने भी मंत्रीपद की शपथ ली है। इसके अलावा एकनाथ गायकवाड़ की बेटी वर्षा गायकवाड़ भी मंत्री बनी है। यनेकी तीनो पार्टियों ने मिलकर राज्य वंश को तरजीह देते हुए मंत्रिमंडल का गठन किया है। हालांकि अपने सम्बन्धियों को टिकट न दिला पाने वाले कुछ नेता असंतोष नज़र आ रहे है। लेकिन पार्टियों द्वारा उन्हें भी कहीं न कहीं ‘सेट’ कर ही दिया जाएगा। ( talented views on maharashtra ) सत्ता में रहने वाली पार्टी के पास असंतुष्टों को संतुष्ट करने के पचास रास्ते होतें है।

किसी को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जा सकता है तो किसी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। विभिन्न समितियों के अध्यक्ष पद पर भी अपनो को रेवड़ियां बांटी जा सकती है और बांटी जाएंगी। लेकिन सत्ता की सबसे ऊपरी मलाई सिर्फ परिवार के लिए रखी गयी है। इस मलाई पर महाराष्ट्र में सिर्फ ठाकरे, पवार, मुंडे, शिंदे परिवार का ही हक है। ( talented views on maharashtra ) कांग्रेस, शिवसेना और कांग्रेस वैसे भी विशुद्ध पारिवारिक पार्टियां है इसलिये इस बंदरबाँट पर कोई अचरज भी नही है।

इस बंदरबाँट में सावधानी इसीलिए भी आवश्यक थी कि विभागों के बंटवारे में हुई थोड़ी सी चूक सरकार को ज़मीन पर लाने में सक्षम थी।  ( talented views on maharashtra ) बहरहाल, अब महाराष्ट्र केबिनेट से उम्मीद है कि वो जनता के मुद्दों की तरफ ध्यान देंगे, लोकसेवा के कार्यों को बिना विद्वेष के आगे बढ़ाएंगे और राज्य को तरक्की की राह पर आगे ले जायेंगे।

Talented View : शिवसैनिकों की गुंडागर्दी

– सचिन पौराणिक

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