Talented View :  खाना हिन्दू है या मुसलमान ?

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कुछ दिन पहले की जोमैटो (zomato) वाली घटना सभी को याद ही है। जब एक हिन्दू ने मुस्लिम डिलेवरी बॉय के हाथ का खाना लेने से इनकार करते हुए अपना आर्डर रद्द कर दिया था। तब जोमैटो के मालिकों ने इस परिस्थिति का फायदा अपने आपको सेक्युलर दिखलाने के लिए उठाया था। जोमैटो ने तब ट्वीट किया था, “खाने का कोई धर्म नही होता, बल्कि खाना अपने आप में एक धर्म है” जोमैटो के इस ट्वीट के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कईयों ने जोमैटो के स्टैंड को सही बताया था तो कुछ ने ग्राहक को सही ठहराया था।

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खैर, इसके बाद ये मामला ठंडा पड़ गया, लेकिन कल कोलकाता में जोमैटो के डिलीवरी बॉयस हड़ताल पर चले गए है। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि जोमैटो पर लोग ‘बीफ’ और ‘पोर्क’ आर्डर करते हैं, जिसे ले जाने में हमारी धार्मिक भावनाएं आहत होती है। हिन्दू कर्मचारी बीफ ले जाना सही नहीं मानते जबकि मुस्लिम पोर्क नही ले जाना चाह रहे। इसलिए जोमैटो के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं।

अब असली सवाल है जोमैटो के मालिकों से। खाने को ही धर्म मानने वाले इन हडताली कर्मचारियों को क्यों बर्दाश्त कर रहे है? एक हिन्दू ग्राहक को हिन्दू के हाथ से ही खाना मांगने पर उसे सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ा देने वाले जोमैटो के मालिक अब खामोश क्यों है? ‘खाने का कोई धर्म नही होता’  मानने वाले यही बात अपने ही कर्मचारीयों को क्यों नही समझा पा रहे हैं? अगर जोमैटो सच मे ही अपनी विचारधारा पर अडिग है तो ‘बीफ’ और ‘पोर्क’ के नाम पर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को तुरन्त बर्खास्त क्यों नही किया जा रहा है?

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सस्ती लोकप्रियता बटोरने और अपनी वाहवाही करवाने के लिए दिखाए गए सिद्धांत क्या वाकई इतने खोखले है? कहने सुनने में बहुत अच्छा लगा कि खाने का कोई धर्म नही होता, लेकिन अगर खाने का कोई धर्म नही होता तो ये हड़ताल आखिर क्यों है? खाना हिन्दू और मुस्लिम होता है तभी तो ये हड़ताल की जा रही है। अगर ऐसा नही होता तो हड़ताल की कोई वजह ही नही थी। हिन्दू बीफ नहीं खा सकते और मुस्लिम पोर्क। अब ये जोमैटो के मालिक ही बतला सकते हैं कि खाने का धर्म होता है या नही?

भारत जैसे देश मे जहां रंगों से लेकर जानवरो तक का बंटवारा धर्म/मजहब के आधार पर हो चुका है वहां खाना भला इससे कैसे अछूता रह सकता है? खाने का धर्म हो चाहे न हो लेकिन इसे खाने वाले और बांटने वालों का धर्म यकीनन होता है। इसलिए बड़े-बुज़ुर्ग कहते आये हैं कि ज्यादा बड़ी बातें नही बनानी चाहिए। अब जोमैटो वाले सच्चे सेक्युलर है तो वो हडताली कर्मचारियों को तुरन्त बर्खास्त करें। अन्यथा सार्वजनिक मंच, जैसे ट्विटर, पर आकर माफी मांगे की हमसे गलती हुई।

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हमने जोश में आकर कह दिया कि खाने का धर्म नही होता, लेकिन ऐसा नही है। खाने का भी धर्म होता है, इसे बांटने वाले का और खाने वाले का भी धर्म होता है। और जोमैटो को कोई हक नही किसी भी शख्स की धार्मिक आज़ादी में खलल डालने का।

 

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