Talented View : सोशल डकैत

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एक बार कुछ मित्रों में चर्चा चल रही थी सच्चा मित्र आखिर कौन है? तमाम तर्कों के बाद भी चर्चा किसी निष्कर्ष पर नही पहुंच पा रही थी। तब एक ने कहा कि – सच्चा दोस्त वो है जो दोस्त के मरने के बाद उसके फोन की “गूगल सर्च हिस्ट्री” डिलीट कर दे। इस बात पर सबने मुस्कुराते हुए सहमति प्रदान की। बात सच भी है। गुगल सर्च हिस्ट्री सार्वजनिक हो जाये तो अच्छे-अच्छो की शराफत की पोल खुल जाए।

इसके साथ ही व्हाट्सप चैट, ट्विटर डीएम और टेक्स्ट मेसेज भी किसी के हाथ लग जाये तो अगले को इज़्ज़त बचाने के लाले पड़ जाएं। मोबाइल गैलरी में इंसान के इतने राज़ छुपे होतें है जितने उसके दिल में भी न छुपे हो। इसलिए आज का युवा अपने ऑनलाइन बैंकिंग पासवर्ड से भी ज्यादा फिक्र गैलरी लॉक की करता है। एक बार युवा अपनी किडनी भी किसी को दान कर दे लेकिन बिना लॉक के मोबाइल वो किसी के हाथ मे देने की सोच भी नही सकता।

युवाओं और उनके मोबाइल के प्रति दीवानेपन को लेकर कई रोचक किस्से है जिन पर चर्चा हम करेंगे। लेकिन आज का मुद्दा ये है कि सोशल नेटवर्किंग साइट व्हाट्सप पर यूज़र्स की जासूसी करने का आरोप लगा है। मामला ये है कि इसरायली जासूसी कंपनी की मदद से दुनियाभर के 1400 से ज्यादा मोबाइल उपकरणों को संक्रमित करके उनसे जानकारियां चुराई गयी है। इसमें भारत के कितने लोगों के कितनी जासूसी की गई है इसका ठीक से अंदाज़ नही लग पाया है। किन्तु एक अनुमान के मुताबिक भारत मे विपक्ष के नेता, पत्रकार और समाजसेवियों के फोन का डेटा भी चुराया गया है।

‘पेगासस’ नाम का ये सॉफ्टवेयर इस हिसाब से बनाया गया है कि इसकी ज़द में एंड्रॉयड, ब्लैकबेरी और आईओएस वाले सभी फोन आ रहे है। सिर्फ एक मिसकाल के ज़रिए भी ये सॉफ्टवेयर मोबाइल में आसानी से पहुंच जाता है। हालांकि मामले के तूल पकड़ने के साथ ही भारत सरकार ने इससे पल्ला झाड़ते हुए व्हाट्सएप से जवाब तलब किया है। सरकार ने कहा कि मामला व्हाट्सएप और इस्रायली कंपनी के बीच का है और सरकार का इसमें कोई लेनादेना नही है।

लेकिन सवाल है कि अगर व्हाट्सप या कोई अन्य सोशल साइट अपने यूज़र्स का डेटा चुरा रही है तो सरकार इस पर लगाम क्यों नही लगा पा रही है? अगर सरकार इन कंपनियों पर शिकंजा नही कसेगी तो भला कौन कसेगा? ‘एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन’ का व्हाट्सएप का दावा क्या झूठा है? या फिर कहीं ऐसा तो नही की सरकार की शह पर ही ये खेल खेला जा रहा है? सरकार अपने विरोधियों की गुप्त सूचनाएं चुरा लेगी तो लोकतंत्र जिंदा कैसे रह पायेगा?

आज के समय में सूचना ही सबकुछ है। इसीलिए इसे सूचना क्रांति का दौर कहा जाता है। लेकिन अगर विरोधियों का मोबाइल ही हैक कर लिया जायेगा, उनकी गुप्त सूचनाएं भी एकत्र कर ली जाएगी, उनकी निजी जिंदगी के पल भी कैमरे में कैद कर लिए जायेंगे तो निजता का अधिकार कहाँ गया? निजता के अधिकारों की सरकार खुद ही यूँ धज्जियां उड़ायेगी तो आम आदमी भला कहाँ जायेगा?

लाख बात की एक बात ये है कि सरकार इस मामले से आसानी से पल्ला नही झाड़ सकती। सरकार व्हाट्सएप जासूसी के इस मामले को गंभीरता से ले और दोषियों पर सख्त कार्यवाही करें। ऐसा नही होता है तो जनता को यही संदेश जाएगा कि सरकार के हाथ भी इसमें रंगे हुए है। आज के दौर में निजता की जरूरत हर किसी को है। किसी के मोबाइल में सेंध लगाने का मतलब उसके कपड़े उतारने के बराबर है। इस तरह चोरी-छुपे अपने मोबाइल में तांकझांक को जनता बर्दाश्त नही करेगी।

          – सचिन पौराणिक

 

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