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Talented View : मोदी को हराना किसी के लिए भी टेढ़ी खीर है

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एक पुरानी कहावत है, “स्वर्ग सभी जाना चाहते हैं, लेकिन मरना कोई नहीं चाहता।” बात सच भी लगती है। ज़िंदगी में कामयाबी, यश, पैसा सभी को चाहिए, लेकिन इसके लिए मेहनत करने को कोई भी तैयार नहीं है। ऐसा ही आजकल भारतीय राजनीति में भी देखा जा रहा है। पूरा विपक्ष यही चाहता है कि कैसे भी करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराया जाए, लेकिन इसके लिए मोदी के बराबर मेहनत करने के लिए कोई तैयार नहीं है।

Talented View : “खोदा पहाड़, निकली चुहिया..”

Today Cartoon On Varanasi Lok Sabha Seat :

भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची भी जारी कर दी है वहीं विपक्ष के बड़े नेता इस जोड़-तोड़ में लगे हैं कि कैसे भी करके उन्हें चुनाव न लड़ना पड़े। ममता बनर्जी चुनाव नहीं लड़ रहीं, मायावती चुनाव नहीं लड़ रहीं, प्रियंका वाड्रा, राशिद अल्वी चुनाव नहीं लड़ रहे। अखिलेश यादव का भी चुनाव लड़ने का मूड नहीं है। शरद पवार, अशोक चव्हाण भी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। पिछली बार मोदी को बनारस से टक्कर देने वाले केज़रीवाल भी इस बार चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं। कुमार विश्वास पहले ही खुद को राजनीति का सबसे कम उम्र का ‘आडवाणी’ घोषित कर चुके हैं। प्रियंका वाड्रा कह रही हैं कि पार्टी कहेगी तो चुनाव लड़ूंगी, लेकिन ये नहीं बता रहीं कि उनके खानदान के अलावा पार्टी में निर्णय लेने की किसी की हैसियत ही कहां है? बनारस में नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभी तक तय नहीं हो पा रहा है कि कौन चुनाव लड़ेगा? अंदरखाने सभी को पता है कि मोदी के सामने जमानत बचाना भी इस बार बड़ी चुनौती है। महागठबंधन भी अपना साझा उम्मीदवार अभी तय नहीं कर सका है।

Talented View : जनता को मुफ्तखोर बनने से रोकें

प्रियंका वाड्रा भाजपा को देश के लिए खतरा बता रही है, लगातार चुनाव प्रचार कर रही है, लेकिन वे खुद भी बनारस से चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगी। कल प्रियंका ने कार्यकर्ताओं को 2022 के चुनाव की तैयारी करने का भी संकेत दे दिया था। उनको भी हवा का रुख समझ आ रहा है। उनकी बोट यात्रा में जनता की भीड़ कहीं नहीं देखी जा रही है, लेकिन कांग्रेस को यदि सच में मोदी को हराना है तो ऐसे बेबसी भरे अंदाज़ में चुनाव लड़ने से कुछ नहीं होने वाला है।

भाजपा अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी (स्मृति ईरानी) को उतार रही है तो कांग्रेस मोदीजी को घेरने में पीछे क्यों है? मोदी के अलावा अमित शाह को गांधीनगर से चुनौती देने में भी कांग्रेस बहुत पीछे है। ऐसी बीसियों सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने भाजपा को पहले ही वॉकओवर दे दिया है। बड़े नेताओं के चुनाव लड़ने से पीछे हटने से लेकर सीट बदलने तक की इस कवायद से जनता में यही संदेश जा रहा है कि मोदी के डर से विपक्ष में भगदड़ मची है। नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार की शुरुआत हो चुकी है। देशभर में 150-200 रैलियों का उनका प्रोग्राम बहुत सोच-विचारकर बना लिया गया है, लेकिन विपक्ष के किसी नेता के पास इतनी बड़ी संख्या में रैलियां करने की कोई प्लानिंग नहीं है।

Talented View : सपना को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए

ऐसे में यदि कोई मोदी के बराबर मेहनत ही करने को तैयार नहीं है तो उन्हें हराने की सोचना भी दूर की कौड़ी है। देश के वर्तमान हालातों में यही कहा जा सकता है कि जैसे मरना कोई नहीं चाहता, लेकिन स्वर्ग सभी जाना चाहते हैं, वैसे ही मोदी को हराना सभी चाहते हैं, लेकिन उनके खिलाफ चुनाव किसी को नहीं लड़ना। उनके बराबर मेहनत भी किसी को नहीं करना। फिर भी कोई मोदी को हराने के ख्वाब देखता है तो इसे मुंगेरीलाल के हसीन सपने ही कहा जा सकता है।

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