Talented View : देश को पीछे धकेलने का प्रयास

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कुछ दिन पहले फ्रांस के पेरिस में गधे पर सवार होकर सड़कों पर घूमते एक शख़्स का वीडियो वायरल हुआ था। मुस्लिम मज़हब के इस शख्स का कहना था कि इस्लाम (Talented View On Muslim Women’s Marriage Rights Protection Bill) मानने वालों को कुरान के हिसाब से ही चलना चाहिए। कुरान में जिस बात का जिक्र नहीं है, उसका हमें इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अब चूंकि जब कुरान लिखी गई होगी या आसमान से उतरी होगी, तब कारें तो थी नहीं इसलिए हमें कार में नहीं बैठना चाहिए। उस समय गधे ज़रूर थे इसलिए गधे की सवारी करना ठीक है।

अब पेरिस में जहां दुनियाभर से पर्यटक पहुंचते हैं, वहां सड़कों पर एक आदमी गधे पर बैठकर घूमता है और वहां की पुलिस यह नहीं समझ पाती है कि इस आदमी को किस अपराध में जेल में डाला जाए ? कल भारत की लोकसभा में तीन तलाक़ बिल आखिरकार पास हो गया। विपक्ष के तीखे विरोध के बावज़ूद सत्ता पक्ष का लोकसभा में बहुमत होने की वजह से यह बिल आसानी से पास हो गया। कांग्रेस सहित विपक्ष के सदन से बाहर निकलने के बाद यह बिल आसानी से पारित हो गया। इस बिल की अग्निपरीक्षा अब राज्यसभा में होगी, लेकिन सदन की कार्यवाही के दौरान जिस तरह की बहस लोकसभा में देखने को मिली, उससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

तीन तलाक़ बिल (Talented View On Muslim Women’s Marriage Rights Protection Bill) का सबसे मुखर विरोध सदन में एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने किया। ओवैसी ने साफ कहा कि यह बिल इस्लाम की मान्यताओं पर आघात करता है और हम मुसलमान इस बिल को नहीं मानेंगे। कुछ इसी प्रकार की बातें मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं की भी सामने आई हैं। कुल मिलाकर सभी मुस्लिम नेता और बुद्धिजीवी कुरान को सर्वोपरि बताकर इस बिल को मानने से साफ इनकार कर रहे हैं। अब लौटते हैं पेरिस की सड़कों पर गधे पर बैठकर घूमने वाले की मानसिकता पर। उसका भी तो यही कहना है कि हम जहां भी रहें, उस देश के कानून को मानने के बजाय हम कुरान, हदीस के ही हिसाब से चलेंगे। क्या भारत के मुस्लिम नेताओं की मानसिकता गधे पर घूमने वाले शख्स की मानसिकता से नहीं मिलती?

हालांकि अभी यह स्पष्ट कर देना उचित है कि कुरान में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है कि महिलाओं का सम्मान न किया जाए या फिर मातृभूमि का अनादर किया जाए। कुरान पढ़कर व्यक्ति अब्दुल कलाम जैसा वैज्ञानिक भी बन जाता है, लेकिन उसके गलत निष्कर्ष निकालकर जिहादी भी बन रहे हैं, आतंकवादी भी बन रहे हैं, यह भी सच्चाई है। अब कुरान का नाम लेकर तीन तलाक बिल का विरोध करने वालों से कुछ सवाल है।

कोई व्यक्ति सऊदी अरब से अपनी बीवी को व्हाट्सएप, मैसेंजर या फिर ई-मेल पर तीन बार तलाक़ लिखकर तलाक़ भेज देता है तो क्या किसी इस्लामी बुद्धिजीवी के मन में सवाल नहीं उठता कि कुरान के समय क्या फेसबुक-व्हाट्सएप थे? कोई शख्स फ़ोन पर बीवी को तीन तलाक बोलकर दूसरी शादी कर रहा है तो क्या मोबाइल फ़ोन उस दौर में था? जिस कार में बैठकर ये नेता संसद में इस बिल का विरोध करने आए, यदि उसी सिद्धांत से चला जाये तो क्या वह कार ‘हराम’ नहीं है? ओवैसी यदि इतने ही समझदार और कुरान के जानकार हैं तो क्यों कार, व्हाट्सएप, फेसबुक, मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, जिनका कुरान में कोई जिक्र ही नहीं है। खुद की सहूलियत के हिसाब से किसी किताब का मतलब निकालना क्या सही है?

कुरान की बातों को अपनी मर्ज़ी से ढालकर ये नेता क्या अपनी राजनीति चमकाने के लिए पवित्र किताब का दुरुपयोग नहीं कर रहे है? ओवैसी जैसे नेताओं को यह समझना चाहिए कि जिस देश में आप रहते हैं, उस देश के कानून, धारणाओं और संस्कृति का सम्मान करना हर धर्म को मानने वालों का पहला कर्तव्य है। कल को हिन्दू बोलेंगे कि हम सिर्फ गीता को मानेंगे, सिख बोलेंगे हम गुरु ग्रंथ साहिब और क्रिश्चियन बोलेंगे हम सिर्फ बाइबल को मानेंगे तो कैसे चलेगा देश? तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम बहनों के लिए यह कानून किसी संजीवनी से कम नहीं है।

किसी महिला के साथ अन्याय होता है तो यह मामला किसी धर्म का नहीं बल्कि सीधे देश से जुड़ा होता है। हर धर्म-मज़हब में समय के साथ, तकनीक के साथ कुछ बदलाव आते ही हैं, जिन्हें सहर्ष स्वीकार करना चाहिये। मज़हब के हवाले से हर अच्छी बात का विरोध देश को पीछे धकेलने का प्रयास है, जिसे विफल करना बहुत ज़रूरी है।

-सचिन पौराणिक

धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं..!

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