Talented View : भारत किसके साथ?

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ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी (General Qasim Sulemani) की हत्या के बाद विश्व एक नए संकट से जूझ रहा है। ये संकट है विश्वयुद्ध (Third World War) का। क्योंकि अमेरिका-ईरान (America-Iran) के बीच टकराव बढ़ता है तो दुनिया दो गुटों में बंट जाएगी और युद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। लेकिन इन अटकलों के बीच एक सवाल कई लोगों के मन मे उठ रहा है। सवाल ये है कि जब कासिम सुलेमानी आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे और अमेरिका भी आईएसआईएस के खिलाफ है तो सुलेमानी को आखिर मारा क्यों गया?

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इसका जवाब जानने के लिए मुस्लिम देशों में हो रही गुटबाज़ी को समझना होगा। कहने को विश्व (Third World War) मे 50 से ज्यादा मुस्लिम देश हैं लेकिन ऐसा नही है कि ये सभी देश एकजुट हैं। इन देशों में आपस मे जबरदस्त मतभेद है। ईरान के हालिया मुद्दे पर ही सऊदी अरब (Saudi Arab), यूएई (UAE) जैसे मुस्लिम देश अमेरिका के साथ खड़े हुए हैं। ईरान के पक्ष में इराक, चीन और रशिया है तो अमेरिका के साथ ब्रिटेन और इजराइल। सुलेमानी के नेतृत्व में ही सीरिया और इराक के कई इलाके आईएसआईएस से आज़ाद करवाये गए हैं।

(Third World War) सुलेमानी की बढ़ती ताकत अमेरिका (America) को रास नही आ रही थी। कुछ साल पहले तक सुलेमानी पर्दे के पीछे से अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन अब वो खुलकर सामने आने लगे थे। अपनी जनता के लिए वो एक हीरो थे। इसके अलावा अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर कई बार हो चुके रॉकेट हमलों के पीछे भी अमेरिका सुलेमानी को ही जिम्मेदार मानता है। इस हमले के कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने ईरान की फौज को आतंकी संगठन और सुलेमानी को आतंकी घोषित कर दिया था।

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(Third World War) व्यापक जनसमर्थन पाने के लिए ट्रम्प (Donald Trump)ने ये तक कह दिया कि सुलेमानी लंदन और नई दिल्ली में भी हमले करवाना चाहता था। लेकिन इस दावे के पीछे कोई सबूत नही है। चुनावी मौसम में ट्रम्प का ये दांव सही लगता है या नही ये वक्त बताएगा लेकिन इस नई परिस्थिति में भारत की भूमिका पर भी गौर करना होगा। प्रथम दृष्टया तो भारत इस लड़ाई में किसी के पक्ष में नही आना चाहेगा। भारत के अमेरिका और ईरान दोनों से बेहतर सम्बन्ध है। ईरान से भारत तेल लेता है तो अमेरिका से हथियार।

लेकिन अगर विश्वयुद्ध (Third World War) है। पहली ये की अमेरिका एक शक्तिशाली देश है जिसके सामने ईरान कभी टिक नही सकता। दूसरी वजह ये है कि भारत के नागरिकता कानून (CAA) पर ईरान से भी विरोध के स्वर उठे थे। जबकि भारत इसे अपने अंदरूनी मामलों में दखल मानता है। लेकिन युद्ध के बनते हालात के असर से हम कदापि बच नही सकते। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) की आहट मात्र से शेयर बाजार धड़ाम हो गया है तो सोने-चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। अगर युद्ध की सुगबुगाहट बढ़ती है तो भारत मे पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ जाएंगे।

बहरहाल, लगता नही की ईरान (Third World War)  जैसा कमजोर देश मस्जिदों पर लाल झंडे लगाने के बाद भी अमेरिका (America) का कुछ बिगाड़ पाएगा। जबकि अमरीका चाहे तो ईरान को तबाह कर सकता है। लेकिन ये तय है कि सुलेमानी की मौत आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ दुनिया की जंग को कमजोर जरूर करेगी। सुलेमानी की मौत के बाद गुस्से में उबल रहे ईरान का पहला दुश्मन अब अमेरिका बन गया है। आतंक के खिलाफ लड़ाई के बीच विश्वयुद्ध की आहट दुनिया के लिए शुभ संकेत नही है।

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– सचिन पौराणिक

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