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Talented View : बस एक तस्वीर मेरे साथ

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‘सेल्फी’ की दीवानगी युवाओं से आगे बढ़कर हर उम्र के लोगों में फैलती जा रही है। कुछ भी नया काम करने से पहले ‘सेल्फी’ लेना आज का ट्रेंड बन गया है। रेस्टॉरेंट में खाने जाना, सिनेमा देखने, कहीं घूमने जाने की सेल्फी (Selfie) तक तो ठीक था लेकिन नित्य कर्म के साथ सेल्फी और यूँही बैठे-बैठे बेवजह ही ‘सेल्फी’ लेने का शगल भी लोगों में बढ़ता जा रहा है। खतरनाक प्राकृतिक स्थलों पर सेल्फी के चक्कर मे हर साल सेकड़ो युवा अपनी जान से हाथ धो बैठते है। जरूरत से ज्यादा सेल्फी कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर रही है।

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सेल्फी (Selfie) लेने वाले कई बार खुद के साथ दूसरों की कार्यक्षमता पर भी बुरा असर डालने लगतें है। इसका ताजा उदाहरण देखने को मिल रहा है देश की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ (Cartoon On Tejas Express Train) में। लखनऊ से नई दिल्ली के बीच चलने वाली ‘तेजस’ कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लबरेज़ ट्रेन है। इस ट्रेन का संचालन निजी हाथों में दिया गया है। लेकिन जनता को इस ट्रेन की जो बात सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही वो है- ‘रेल होस्टेस।’ पीले-काले रंग के खबसूरत कॉम्बिनेशन और चुस्त पौशाक में सजी-संवरी इन बालाओं के साथ सेल्फी लेने की यात्रियों में होड़ मच जाती है।

यात्रियों कि उतावलेपन और इनके साथ सेल्फी लेने की बेकरारी में कई दफा इनकी सेवाएं भी प्रभावित होती है। रेल होस्टेस का काम यात्रियों को खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराना होता है लेकिन अत्यधिक सेल्फी की वजह से ये अपना काम भी ठीक से नही कर पा रही है। ‘तेजस’ ट्रेन पहले ही सुर्खियों में है। इसलिए इसमें सफर करने वाले यात्री चाहतें है कि वो पूरी दुनिया को ये दिखा दे कि वो ‘तेजस’ में बैठे है। इसका सबसे आसान तरीका उन्हें रेल होस्टेस के साथ सेल्फी लेना ही नज़र आता है।

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तेजस में कई तरह की सुविधाएं है लेकिन सुर्खियां सिर्फ ये होस्टेस बटोर रही है। ये बात हम भारतीयों के चरित्र की तरफ एक इशारा करती है। सोशल मीडिया में भी इन होस्टेस (Cartoon On Tejas Express Train Hostess) की ड्रेस चर्चा और तर्क का विषय बनी हुई है। कुछ लोगों को ये पौशाक पसन्द आ रही है तो कुछ इसमें भारतीयता, संस्कृति और शालीनता का अभाव देख रहे है। लेकिन इस चर्चा से ये बात फिर स्पष्ट होती है कि हमारे चरित्र में कुछ तो गड़बड़ है। महिलाओं की ड्रेस में हम हमेशा कुछ न कुछ कमी ढूंढते ही रहतें है। अगर तेजस के होस्टेस लड़के होते तब वो चाहे जो पहनते उसकी कोई चर्चा नही होती और न उनके साथ कोई सेल्फी लेता दिखाई देता।
खेर, इतनी अक्ल और समझ सभी मे होना ही चाहिए कि बिना किसी महिला की इजाज़त के उसके साथ तस्वीर न ली जाए। और किसी के कर्तव्यों में विघ्न डालकर भी तस्वीर कभी नही लेना चाहिये। तेजस जैसी और ट्रेनों की देश को जरूरत है। निजी हाथों में आने से न सिर्फ यात्रियों की सुविधाएं बढ़ेंगी बल्कि ट्रेनों की टाइमिंग भी सुचारू रहेगी। हमे इन रेल होस्टेस के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए इनकी सेवाओं का लाभ उठाना चाहिये। उन्हें हैरान करने से हम अपनी इज्जत तो मिट्टी में मिला ही रहे है बल्कि उनकी सेवाओं की गुणवत्ता भी खराब करतें है। ऐसे व्यवहार से हमे बचना चाहिये।

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      – सचिन पौराणिक
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