Talented View : “युवा नेताओं की भ्रूण हत्या”

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युवा नेता बनने की रेसिपी में सफेद कुर्ते पजामे, सोने की चैन, 8-10 चेले-चपाटे के अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ लगती है वो है गली-नुक्कड़ पर लगने वाले बड़े-बड़े बेनर और होर्डिंग्स (Tulsi Silawat)। इन बैनरों में छुटके नेताजी कभी किसी बड़े नेता को जन्मदिन की बधाई देते नजर आतें है तो कभी मंदिर में भंडारा कराते हुए। इन बेनर-होर्डिंग द्वारा ही लोगों को ये पता चलता है कि उनके शहर में किसी युवा नेता का उदय हो रहा है।

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अमूमन हर शहर-गांव में ऐसे युवा नेताओं का उदय लगातार होता रहता है। इन्ही की वजह से शहर के खूबसूरत चौराहे गंदे बैनरों से पटे पड़े रहतें है। इन युवा नेताओं के चलते ही बाहर से आये यात्री शहर में सूचना-पट्ट देखने को तरस जातें है। क्योंकि ऐसे हर साइनबोर्ड पर नेताजी के बैनर टंगे होतें है (Tulsi Silawat)। शहर की खूबसूरती पर बट्टा लगाते इन बेनर-होर्डिंग्स को हटाने का जिम्मा अबकी बार मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने उठाया है।

हालांकि ये मुहिम कितनी कारगर होगी अभी से कुछ कह नही सकते। क्योंकि मंगलवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के जन्मदिन पर लगे अवैध होर्डिंग उतरवाने निगम कर्मचारी पहुंचे तो मंत्रीजी के रिश्तेदारों ने उनकी कायदे से पिटाई लगा दी। कर्मचारियों की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है लेकिन मंत्रीजी के रिश्तेदार-चाहने वालो के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराएं लगाने की बजाय सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति की रस्म निभाई है।

अब मुख्यमंत्री कह रहे है कि मेरे फ़ोटो वाले अवैध बेनर लगें है तो उनको भी बिना किसी संकोच के उतरवाया जाए। कमलनाथ ने अपने समर्थकों से निगम कर्मचारियों को पीटने से मना किया या नही ये अभी तक मालूम नही चल पाया है। लेकिन इस तरह पूरे प्रदेश में बेनर-होर्डिंग उतरवाए जाएंगे तो बेचारे ‘युवा नेता’ कहाँ जाएंगे? इस कार्यवाही से उभरते हुए नेताओं की ‘भ्रूण हत्या’ तो नही हो जायेगी?

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सूत्रों से पता चलता है कि चौराहों पर फ्लेक्स लगाने वाले युवा नेता अक्सर ‘उधारी’ में ये काम करवातें है। नियम सम्मत होर्डिंग लगवाने में खर्चा कुछ ज्यादा ही हो जाता है। आर्थिक मंदी की मार झेल रहे युवा नेता ऐसे में कैसे अपनी ‘राजनीतिक दुकान’ सजा पायेंगे? अगर चौराहों पर बेनर नही दिखेगा तो युवा नेता को भला कौन याद रखेगा? सरकार के इस कानून के बाद युवा नेताओ के सामने अपने अस्तित्व को बचाये रखने की समस्या खड़ी हो गयी है।

एक आम नागरिक के दृष्टिकोण से देखा जाए तो प्रदेश सरकार का ये कदम सराहनीय है। लेकिन निगम कर्मचारियों के लिए बेनर हटाते समय नेताओं के चमचों द्वारा खुद को पिटने से बचाना एक बड़ी समस्या होगी। और युवा नेताओ के लिहाज़ से सोचें तो जिस प्रकार कन्या भ्रूण को बचाने के लिए समाज मे व्यापक अभियान चलाया गया है उसी प्रकार युवा नेताओं को अपना डूबता कैरियर बचाने के लिए भी भागीरथी प्रयास करने होंगे। युवा नेताओं को अपनी संभावित ‘भ्रूण हत्या’ रोकने के लिए खुद ही कुछ उपाय खोजने होंगे।

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        – सचिन पौराणिक

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