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Talented View : मुफ्त खोरी का गुरुकुल

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के बाद एक नई चर्चा ने जन्म लिया। चर्चा ये थी कि क्या देश में उच्च शिक्षा निशुल्क होना चाहिये? क्योंकि जब देश के नामी आइआइटी, आईआईएम में शिक्षा महंगी है तो जेएनयू को विशेष रियायत क्यों दे रखी है? रेलवे स्टेशन पर आधे घंटे गाड़ी रखने के भी ठेकेदार 20 रुपये ले लेता है, उसी दौर में दिल्ली के जेएनयू में छात्रों को 10 रुपये महीने में कमरा मिल रहा है तो इसकी चर्चा होना ही चाहिये।

चर्चा इसलिए भी होना चाहिए कि जिन छात्रों को मुफ्त में इतनी सुविधाएं दी जा रही है वो आखिर कर क्या रहे है? जेएनयू के छात्र कभी भारत के टुकड़े होने के नारे लगाते दिख जातें है तो कभी आतंकी के समर्थन में, कभी ये लौग माँ दुर्गा के बारे में अभद्र टिप्पणियां करते है तो कभी भारत माँ के बारे में। कॉलेज केम्पस को वेश्यावृत्ति का अड्डा बना चुके जेएनयू के छात्रों ने इस बार स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की है।

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मूर्ति के नीचे भगवा को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी गयी और मूर्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया है। स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को इस तरह नुकसान पहुंचाने की कोई तर्कसंगत वजह दिखाई नही दे रही है। ये जेएनयू के शरारती छात्रों की सिर्फ माहौल खराब करने की एक कोशिश है। आरोपी छात्रों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्यवाही की बात अब यूनिवर्सिटी प्रशासन कर रहा है लेकिन उनकी बातों में वजन नही है। प्रशासन अगर सच मे ही कार्यवाही की हिम्मत करता तो यूनिवर्सिटी में आये दिन इस तरह के बवाल नही होते।

जेएनयू दरअसल टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। देश की संस्कृति, हिन्दू देवी-देवताओं और भगवा रंग के प्रति इनकी नफरत जगजाहिर है। लेकिन आश्चर्य इस बात पर होता है कि इन सपोलो पर कोई कार्यवाही क्यों नही की जाती? अगर इन्हें बवाल काटने का इतना ही शौक है तो रेपिड एक्शन फ़ोर्स, पीएसी या फिर अर्धसैनिक बलों की टुकड़ी यूनिवर्सिटी में क्यों नही स्थायी तौर पर तैनात कर दी जाती है? जिसे भी भारत से आज़ादी चाहिए उसे ये जवान माकूल जवाब देंगे। जो भाषा ये समझते है उसी भाषा मे हमारे जवान इस गैंग को समझाने में पूरी तरह सक्षम है।

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भारत के टुकड़े होने के नारे लगाने वालों की हिम्मत कैसे हो जाती है विवेकानंद की प्रतिमा से छेड़छाड़ की? निश्चित तौर पर ये केम्पस में अनुशासन की कमी की वजह से है। जेएनयू के तथाकथित छात्रों की इस गुंडागर्दी पर सरकार को सख्त कार्यवाही अब कर ही देना चाहिये। जेएनयू के छात्र दरअसल छात्र नही ऐसे जहरीले सपोलें है जिनका फन कुचलना अत्यावश्यक हो गया है। इनकी नसबंदी अब भी नही की गई तो ये आगे चलकर भारत की अखंडता के लिए चुनौती बन जाएंगे।

छात्रों के दबाव में आकर प्रशासन ने फीस वापसी की जो घोषणा की है उसी का परिणाम है कि इनके हौसले इतने बढ़ गए है। जेएनयू में अनुशासन पुनर्स्थापित करने के लिए सबसे पहले इस संस्थान कि फ़िस भी बाकी संस्थाओं जितनी कर देना चाहिए जिससे सेकड़ो मुफ्तखोर अधेड़ उम्र के छात्रों को यहां से विदाई दी जा सके। स्वामी विवेकानंद का अपमान करने वाले छात्र नही हो सकते इसलिए दोषियों से छात्रों की तरह नही बल्कि पेशेवर अपराधियो की तरह सख्ती से पेश आना होगा। यूनिवर्सिटी पढ़ाई की जगह है बवाल की नही। नेताओं को भी छात्रों के विरोध को हवा देकर इनके भविष्य से खिलवाड़ करना तत्काल बंद करना चाहिए।

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