परिस्थितियां सुधरने के बजाय बिगड़ी

0

भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में खेले गए एशिया कप के क्रिकेट मैच में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। मैच के दौरान पाकिस्तान और भारत  दोनों के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह था। पाकिस्तान समर्थक खूबसूरत लड़कियों की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई रही, लेकिन जिस तस्वीर ने मेरा सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया, उसमें स्टेडियम में मजे से बैठे राजीव शुक्ला दुबई के किसी शेख से बातचीत करते दिखाई दे रहे थे। राजीव शुक्ला कांग्रेस के नेता, पूर्व पत्रकार, आईपीएल के पूर्व चेयरमैन और बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। आईपीएल के दौरान होने वाली वित्तीय अनियमितताओं की जांच चेयरमैन पर हमेशा आती ही है, लेकिन राजीव शुक्ला को मैच का मज़ा लेते देख 2014 के बाद और पहले के भाजपा नेताओं और समर्थकों के बयान एकाएक याद आने लगे।

2014 के चुनाव से पहले और जीतने के बाद सरकार के लोगों ने ऐसे-ऐसे वादे किए थे, जैसे मोदी सरकार आसमान से चांद-तारे तोड़कर देश की जनता के सामने तश्तरी में परोस देगी। अचानक याद आया वह बयान, जो बार-बार सुनने में आ रहा था कि यह चुनाव हारते ही सोनिया गांधी इटली भाग जाएगी। हालांकि सोनिया आज भी यहीं है, लेकिन माल्या, मोदी और मेहुल ज़रूर देश से भाग चुके हैं। कहा जाता था कि सब भ्रष्टाचारी जेल जाएंगे,  रॉबर्ट वाड्रा पर निशाने साधे जाते थे, लेकिन एक भी नाम याद नहीं आ रहा, जिसे भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाला गया हो।

केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार, राजस्थान-हरियाणा (जहां की जमीनों को लेकर वाड्रा को विवादों में घसीटा गया था) में भाजपा सरकारों के होने के बावजूद रॉबर्ट वाड्रा आज भी मज़े में आजाद घूम रहे हैं। कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे “भारत तेरे टुकड़े होंगे” वाले भी खुले घूम रहे हैं क्योंकि 56 इंच की सरकार द्वारा उन पर आज तक एक चार्जशीट तक दाखिल नहीं की गई है। याद आने लगे वो बयान बाबाजी के जो पेट्रोल 50 रुपए पर लाने का दम भरते थे, आज पेट्रोल शतक की तरफ बढ़ रहा है, बाबाजी जाने कहां गायब है।

कहा जाता था कि महिलाओं की छोड़िये देश की सीमाओं की तरफ भी कोई आंख उठाकर नहीं देख पाएगा, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा की बातों का नतीजा क्या निकला, यह देश देख रहा है। भक्त कहते थे कि सरकार बनते ही चीन-पाकिस्तान हमसे थर-थर कांपने लगेंगे, लेकिन अभी कुछ दिन पहले खबरें आईं थी कि पाक ने हमारे जवान के साथ बर्बरता की सभी हदें लांघ दी और चीन उत्तराखंड में हमारी सीमा में कई किलोमीटर अंदर तक घुस आया। साहब गरीबों के घर बनवाने के दावे करते हैं, लेकिन जिन ‘श्रीराम’ के नाम पर ये सत्ता में आए, वे आज भी तिरपाल के नीचे बैठे हैं।

हिंदुओं की सरकार ने हिंदुओं के लिए क्या किया, यह पूछने पर भक्त कहते हैं कि राहुल गांधी पहली बार मंदिर गए। वैसे राहुल गांधी मंदिर जाएं या मस्जिद इससे हिंदुओं का कैसे भला होगा, यह पता नहीं। पेट्रोल की बढ़ती कीमत का पूछो तो सस्ती दाल की दुहाई देते हैं, लेकिन यह नहीं बतलाते कि जब कांग्रेस के समय पेट्रोल के दाम बढ़ते थे, तब दाल का क्या भाव था? पाकिस्तान को सबक सिखाने का कहने पर बंटवारे में नेहरू की गलतियां निकाल लाते हैं, लेकिन एक के बदले 10 सिर लाने की बात का जवाब नहीं मिलता। राफेल का जिक्र करो तो बोफोर्स उखाड़ लाते हैं मानो कांग्रेस ने यदि कोई घोटाला किया है तो इतना हक तो इनका भी बनता ही है। बेरोजगारी की बात करो तो पकौड़े तलने की सलाह देते हैं।

खैर, मुद्दे की बात यही है कि ऐसे आसमानी वादों की एक लंबी लिस्ट है, जिन पर कोई सवाल ही नहीं पूछता। भ्रष्टाचार इस देश में आज भी वहीं का वहीं है क्योंकि इस पर कोई लगाम ही नहीं है। सब भ्रष्टाचारी मस्त हैं क्योंकि सरकार के पास किसी को जेल भेजने की हिम्मत ही नहीं है। चांद-तारे तोड़ने का दावा करने वालों को समझना चाहिए कि धरातल पर परिस्थितियों में कोई आमूलचूल बदलाव नहीं आया है। माना कि आपने सड़कें बनवाई, हवाई अड्डे बनवाए, ढेर सारी योजनाएं लाए, लेकिन जनता के मसलों से सीधे जुड़ने में यह सरकार अब तक नाकाम ही साबित हुई है। दलित एट्रोसिटी एक्ट हो या राम मंदिर, धारा 370, समान नागरिक संहिता, महंगाई, पेट्रोल, बेरोजगारी आदि मुद्दों पर कोई जवाब किसी के पास नहीं है।

हालांकि यह सभी समझते हैं कि देश की सभी समस्याओं को सुलझाने में 5 साल का वक्त नाकाफी है, लेकिन 60 साल के बदले 60 महीने मांगने वाले भी आप ही थे इसलिए जनता की उम्मीदें बहुत स्वाभाविक है। अब चुनाव के ऐन पहले यदि आप कोई नए वादे करते हैं तो सवाल तो पूछे जाएंगे ही कि पुराने वादों का क्या हुआ? ऐसे सवाल सरकार को सुहाते नहीं है, लेकिन सवाल लोकतंत्र में ज़रूरी है इसलिये चाहे किसी को अच्छा लगे चाहे न लगे, हम यह सवाल लगातार पूछते ही रहेंगे।

-सचिन पौराणिक

Share.