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Talented View : सीएम कुर्सी के खातिर शिवसेना ने बदले सिद्धान्त

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बालासाहब ठाकरे (Bala Saheb Thakre) एक निर्भीक हिंदूवादी नेता थे। उन्होंने ही महाराष्ट्र में शिवसेना (Shiv Sena)  की नींव रखी और पार्टी को अपने पसीने से सींचा। आज भी महाराष्ट्र में शिवसेना का एक बड़ा वोटर सिर्फ बालासाहब की वजह से ही उन्हें वोट करता है। सत्ता में सक्रिय भागीदारी में शामिल हुए बिना भी राज्य की बागडोर अपने हाथ रखने की कला बालासाहब को बखूबी आती थी। लेकिन आज शिवसेना (Shiv Sena) जिस मुकाम पर खड़ी है, अगर बाल ठाकरे जिंदा होते, तो खुश तो हरगिज़ नही होते।

Talented View : “युवा नेताओं की भ्रूण हत्या”

हिंदूवादी पार्टी के युवा नेता आदित्य ठाकरे अजमेर दरगाह पर जाकर माथा टेक रहे है और मुख्यमंत्री पद के लालच में पार्टी कांग्रेस-एनसीपी जैसे विपरीत ध्रुवों का समर्थन लेने में भी गुरेज़ नही कर रही है। राज्य की कुल 288 सीटों में से सिर्फ 56 सीटें जीतकर आने वाली शिवसेना बेशर्मी से मुख्यमंत्री पद पर दावा कर रही है। सत्ता की मलाई खाने को इतनी बेकरारी शिवसेना में पहले कभी नही देखी गयी। दलील दी जा रही है कि 50-50 का फार्मूला भाजपा के साथ पहले ही तय कर लिया गया था।

लेकिन अगर ऐसा था तो ये बात तब सार्वजनिक क्यों नही की गयी? क्या उन्हें ये डर सता रहा था कि जनता उन्हें पूरी तरह नकार तो नही देगी? शिवसेना अपना मुख्यमंत्री सीटों के आधार पर भी नही मांग सकती क्योंकि भाजपा की सीटें 105 है। यनेकी सेना से तकरीबन दुगुनी। मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी या फिर जुगाड़ द्वारा मुख्यमंत्री बनने की बातें करके शिवसेना सिर्फ जनता के बीच अपनी छवि धूमिल कर रही है। अगर एनसीपी-कांग्रेस के समर्थन से शिवसेना सरकार बनाएगी तो जनता अगले चुनाव में उनका सूपड़ा साफ कर देगी।

Talented View : काला कोट vs ख़ाकी वर्दी

लेकिन शिवसेना भी इतनी नादान नही है। संजय राउत चाहे जितनी बयानबाजी कर लें ये तय है कि शिवसेना को आखिर भाजपा के साथ ही आना है। इसे भविष्यवाणी के तौर पर भी लिया जा सकता है कि शिवसेना-भाजपा मिलकर ही राज्य में सत्ता बनाएंगे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे। और ये सरकार अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करेगी। पत्नी की तरह रूठकर मायके चले जाने जैसी धमकियां शिवसेना देती रहेगी लेकिन भाजपा को इनसे रत्तीभर भी फर्क नही पड़ना है।

शिवसेना को सोचना होगा कि जिस साथी के साथ सरकार चलाना है उनके बारे में इतना भला-बुरा भी नही कहना चाहिए कि मामला हाथ से निकल जाए। अगर ऐसा होता है तो इससे सिर्फ यही सिद्ध होगा कि विरासत में मिली जमी-जमाई पार्टी भी उद्धव सम्हाल नही सके। अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव की तरह अपनी पार्टी को तबाह करने की कड़ी में अगला नाम उद्धव ठाकरे का जुड़ जायेगा। और न जाने क्यों जब भी ठकरे परिवार का जिक्र होता है तो अंजना की आदित्य ठाकरे के लिए “शिवसेना का राहुल गांधी” वाली टिप्पणी स्वतः स्मरण आ जाती है।

 Talented View : वकील या फाइटर

इतना तय है कि बालासाहब जिंदा होते तो शिवसेना की इतनी किरकिरी नही होती। बहरहाल अब उद्धव ठाकरे को ही निर्धारित करना है कि भविष्य में शिवसेना को संजीदा पार्टी के तौर चलाना है या फिर नौटंकी और दबाव की राजनीति करने वाली पार्टी के तौर पर। बाकी शिवसेना को आज नही तो कल भाजपा की गोद मे ही बैठना है ये एक अटल सत्य है।

         – सचिन पौराणिक
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