Talented View : मामा का ताना या तारीफ

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Legislative Assembly election) में भाजपा-कांग्रेस (BJP And Congress) के बीच कांटे की टक्कर थी। ऐसा लग रहा था कि अंतर भले कम हो लेकिन भाजपा (BJP) बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लेगी। लेकिन तभी बात आरक्षण पर छिड़ गई। और ऐसे नाजुक मौके पर बयानवीर मामा शिवराजसिंह (Shivraj Singh Chouhan) ने कह दिया कि कोई “माई का लाल” आरक्षण खत्म नही कर सकता। इस माई के लाल शब्द पर जनरल केटेगरी के लोग भड़क गए। सवर्ण और जनरल केटेगरी के लोग भाजपा के पक्के वोटर थे।

इसी वजह से उन्होंने अपने गुस्से के बाद भी कांग्रेस के साथ जाना गवारा नही किया और ‘नोटा’ का साथ देने के लिए आंदोलन किया। लेकिन मामाजी की बुद्धि इतनी भ्रष्ट हो गयी थी कि उन्होंने जनता को मनाने या माफी मांगने की बजाय कहा कि नोटा वाले कुछ नही बिगाड़ पाएंगे। इसके बाद फिर जो हुआ वो इतिहास है। विधानसभा की 20 से ज्यादा सीटें ऐसी रही जिन पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा में गिरे और भाजपा सत्ता से बाहर हो गयी।

कहने का आशय यही है कि जीती हुई बाज़ी को अपने बतोलेबाज़ी से हराने की कला शिवराज मामा अच्छे से जानते है। ‘माई के लाल’ ने उन्हें प्रदेश की सत्ता से बाहर किया लेकिन उन्होंने शायद इस प्रकरण से कुछ सबक लिया नही। अभी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हुए हैं। उनके भाजपा में आने से मामाजी को फिर से सत्ता सुंदरी के ख्वाब दिखने शुरू हो गए हैं। लेकिन फिर मुख्यमंत्री बनने की ललक में मामाजी फिर अपनी जुबान को काबू में नहीं रख पा रहे है।

“दंगाइयों के ऊपर कोर्ट का हाथ”

कल सिंधिया के स्वागत में हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ देखकर मामाजी बहक गए और सिंधिया के लिए उन्होंने कह दिया कि पाप की लंका को जलाना है तो विभीषण का साथ जरूरी है। सिंधिया के साथ मिलकर हम मध्यप्रदेश की लंका को जीत लेंगे। ये सुनकर सिंधिया भी सोच रहे होंगे कि कहां वो खुद को हनुमान समझकर भाजपा में आ रहे है और आने के साथ ही उन्हें विभीषण बतला दिया है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस के नेता खुलकर इस बयान कि चर्चा कर रहे है कि सिंधिया को भाजपा में कभी सम्मान नही मिलेगा। पहले दिन ही भाजपा ने उन्हें विभीषण बता दिया है।

Talented View : मामा का ताना या तारीफ

गौरतलब है कि प्रदेश में अभी बहुमत परीक्षण बाकी है। अपनी सत्ता बचाने के लिए कमलनाथ और जीतू पटवारी मिलकर एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे है। सिंधिया ग्रुप के विधायक किस तरफ जाएंगे इस पर भी अभी संशय बना हुआ है। ऐसे में सिंधिया को विभीषण बतलाकर शिवराज फिर अपनी पार्टी का खेल बिगाड़ने पर तुले हुए है। सिंधिया के पास अब कोई चारा नही है लेकिन उनके समर्थक विधायक इस व्यवहार पर जरूर गुस्सा हो सकतें है। अगर सिंधिया के विधायक भाजपा के साथ नही आये और कमलनाथ ने विधानसभा में बहुमत परीक्षण पास कर लिया तो भाजपा को मुंह छुपाना मुश्किल हो जाएगा।

महाराष्ट्र में अपमान का घूंट पीने वाली भाजपा का दांव मध्यप्रदेश में भी उल्टा पड़ा तो इससे पार्टी की जगहंसाई हो जाएगी। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सोचना चाहिए कि शिवराज के उलजुलूल बयान कहीं पार्टी को भारी न पड़ जाएं। कांग्रेस के लिए जो काम दिग्विजयसिंह करते हैं भाजपा के लिए मामाजी भी उसी राह पर चल पड़े हैं। मामाजी को वक्त रहते नही रोका गया तो मामाजी ऐसा रायता फैलाएंगे जिसे समेटना अमित शाह और जेपी नड्डा के लिए भी मुश्किल होगा।

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Sachin Pauranik

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