Talented View : शिवसैनिकों की गुंडागर्दी

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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Cartoon On Chief Uddhav Thackeray) के मुख्यमंत्री बनते ही शिवसैनिकों की गुंडागर्दी शुरू हो गयी है। नई-नई सेक्युलर बनी शिवसेना के कार्यकर्ता अपनी हरकतें सुधार नही पा रहे है। शिवसेना के कार्यकर्ताओं (गुंडों) ने एक शख्स को सिर्फ इसलिए मारा-पीटा, मुंडन कर दिया क्योंकि उसने फेसबुक पर उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। अपने मुखपत्र सामना में रोज़ ही आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले अपने नेता के खिलाफ ‘सच’ भी नही पचा पाये।

जामिया घटना पर उद्धव ठाकरे (Cartoon On Chief Uddhav Thackeray)  ने इस घटना की तुलना जलियां वाला बाग से कर दी थी। तब इस शख्स ने उद्धव को ‘टकला’ बोलकर एक टिप्पणी की थी जिससे शिवसैनिक नाराज़ हो गए थे। हालांकि धमकी मिलने पर उसने वो पोस्ट डिलीट कर दी थी लेकिन तब भी शिवसैनिक उसके घर पहुंच गए, उसे मारा-पीटा और सर मुंडवा दिया। उसे आगे से उद्धव ठाकरे के बारे में कुछ न लिखने की धमकी भी दी गयी। गुंडों ने कहा उद्धव हमारे भगवान है और उनके लिए हम कोई टिप्पणी बर्दाश्त नही करेंगे।

सरेआम इस तरह की गुंडागर्दी की जा रही है लेकिन अब शिवसेना (Cartoon On Chief Uddhav Thackeray) चूंकि ‘सेक्युलर’ पार्टी बन चुकी है इसलिए इस घटना पर राजनीति नही हो रही है। कांग्रेस, एनसीपी ने इस पर चुप्पी साध ली है क्योंकि उन्हें उद्धव के साथ मिलकर सत्ता की मलाई खानी है। महाराष्ट्र में रहने वाले उत्तर भारतीय भी भयभीत है क्योंकि शिवसेना के सत्ता में आने के साथ ही उनके खिलाफ गुंडागर्दी बढ़ सकती है। शिवसेना के मोटी चमड़ी के नेता ये समझ नही पा रहे है कि इस तरह की घटनाओं से जनता में उनके खिलाफ गुस्सा पनपता है।

इस तरह की राजनीति के चलते ही शिवसेना राज्य के बाहर कभी पैर नही पसार सकी है। यूपी की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के मध्यप्रदेश में भी विधायक है, हैदराबादी ओवेसी की एआईएमआईएम के महाराष्ट्र में भी विधायक है, दिल्ली की आम आदमी पार्टी के पंजाब से सांसद चुने गए है लेकिन महाराष्ट्र की पार्टी शिवसेना का पड़ोसी राज्यो में भी कोई नामलेवा नही है। शिवसेना महाराष्ट्र के बाहर कहीं अपना पार्षद बनवाने की हैसियत भी नही रखती तो इसके पीछे ऐसी हरकतें ही जिम्मेदार हैं।

यूपी-बिहार के लोगों में तो शिवसेना के खिलाफ इतना गुस्सा है कि कोई शिवसैनिक (Cartoon On Chief Uddhav Thackeray) पूर्वांचल में शिवसेना का झंडा भी लगा ले तो उसकी कुटाई पक्की है। देश में साम्प्रदायिकता का जहर घोलने वाले कई दल हैं लेकिन क्षेत्रीयता के जहर को किसी ने सबसे ज्यादा घोला है तो वो शिवसेना ही है। असलियत में ये पार्टी सिर्फ एक परिवार की पार्टी है जो सत्ता के लिए किसी विचारधारा से समझौता करने में पीछे नही हटती।

अपने राज्य में बाहर से आये बेगुनाहों पर दम दिखाने वाले शिवसैनिकों (Cartoon On Chief Uddhav Thackeray) में सच में ही हिम्मत है तो यूपी-बिहार में बैठकर उद्धव पर टिप्पणी करने वालों का उनके घर जाकर मुंडन करके दिखाए। लेकिन शिवसैनिक कायर हैं। उनमें इतनी हिम्मत कहां? वो तो बस अपने राज्य में आए बाहरी लोगों पर ही गुस्सा निकाल सकतें हैं। देश के भविष्य के लिए इस तरह की राजनीति घातक है। सार्वजनिक जीवन मे रहने वालों को आलोचना से ऐसे बौखलाना नही चाहिए। इस तरह की बचकाना हरकतें बर्दाश्त करना यही बतलाता है कि उद्धव अभी राजनीति के कच्चे खिलाड़ी है। ऐसी घटनाएं देखकर लगता है कि अपने पिताजी के दम पर मिली इज़्ज़त और शोहरत को न उद्धव खुद पचा पा रहे है और न ही उनके उद्दंड कार्यकर्ता।

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– सचिन पौराणिक

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