website counter widget

Talented View :  युवा लायक या नालायक

0

सत्ता का नशा सर चढ़कर बोलता है। चाहे जो पार्टी शासन में रहे उसके नेता जल्दी ही खुद को शहंशाह और जनता को मूर्ख समझने लगतें है। मोदी सरकार 2.0 में भी कुछ नेता, मंत्री यही गलती दोहरा रहे है। पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ओला-उबर को जिम्मेदार ठहराना, उसके बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल का घटती विकास दर के सवाल पर आइंस्टीन और गुरुत्वाकर्षण का बेतुका सम्बन्ध जोड़ना और अब केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का बेरोज़गारी पर घटिया बयान यही दर्शाता है कि भाजपा नेता अपने दुसरे कार्यकाल में सत्ता की ताकत को हजम नही कर पा रहे है।

Talented View : ज्ञानी नेता का अज्ञानी बयान

संतोष गंगवार ने उत्तर भारत मे बेरोज़गारी के सवाल ये कहा था कि – “देश मे नौकरियों की कोई कमी नही, लेकिन उत्तर भारतीय युवाओं में वो काबिलियत नही है कि उन्हें रोज़गार दिया जा सके।” गंगवार द्वारा फेंकी गई इस ‘नो बॉल’ पर विपक्ष को ‘फ्री हिट’ मिलना ही था। प्रियंका वाड्रा समेत विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस नो बॉल का भरपूर इस्तेमाल किया। हालांकि फ़जीहत होती देख मंत्री जी ने तत्काल सुर बदल लिए और कह दिया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।

Talented View : मोटर व्हीकल कानून – सज़ा या सीख

लेकिन अगर ये मंत्री बेरोज़गारी के लिए युवाओं की योग्यता और मंदी के लिए ओला-उबर को जिम्मेदार ठहरा सकतें है तो गरीबी और अशिक्षा के लिए बच्चों के माता-पिता को भी जिम्मेदार ठहरा सकतें है। कल को कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कमी इसलिए है कि लोगों की आदतें खराब है, भ्रष्टाचार इसलिए ज्यादा है क्योंकि लोग लालची है, सड़कों पर एक्सीडेंट इसलिए ज्यादा होतें है क्योंकि लोगों को गाड़ी चलाना नही आता, महंगाई इसलिए है क्योंकि लोग ज्यादा खर्च करतें है, किसान इसलिए परेशान है क्योंकि वो फ़िज़ूल खर्चे करता है।

सरकार अगर ज़मीन से कट जाए तो ऐसे ही (कु)तर्क सामने आ सकतें है। वोट देते समय ये युवा सबसे ज्यादा काबिल होतें है लेकिन नौकरी के सवाल पर युवाओं में सरकार को काबिलियत नज़र नही आती। कश्मीर के युवाओं को रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार बताए उन पत्थरबाजों में ऐसी कौन सी काबिलियत है जो उत्तर भारत के युवाओं में नही है? संतोष गंगवार की खुद क्या काबिलियत है जो वो मंत्री बने बैठे है? इन युवाओं के समर्थन से ही मंत्रीपद पाने वाले जब कुर्सी पर बैठकर युवाओं का मज़ाक बनातें है तो युवा खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।

आप मोदीजी के समर्थक है या विरोधी, सच्चाई से कभी आंखे नही चुराई जानी चाहिये। देश के आर्थिक हालात चिन्ताजनक है, युवा बेरोज़गार है, नौकरियां मिल नही रही है, रोज़गार और स्वरोजगार की खोखली बातों का ढोल बजाया जा रहा है ये धरातल की सच्चाई है।मंदी की आहट से निजी क्षेत्र में खलबली मची हुई है, कर्मचारी भयाक्रांत है और उद्योगपति खुद कठिनाइयों से जूझ रहे है। नई नौकरियाँ मिल तो नही रही है बल्कि जो है उनके भी छिन जाने का खतरा बना हुआ है।

Talented View : बड़बोला पाक

ऐसे हालातों में कोई गंगवार आकर कहता है कि युवा नाकाबिल है तो इसमें गलती किसकी है?  युवा वही पढ़ाई तो करेगा ना जो स्कूल-कॉलेजों में करवाई जा रही है? अब वो शिक्षा व्यवहारिक नही है तो इसमें सरकारों की गलती है या युवाओं की? खुद की गलतियों को युवाओं के माथे मढ़कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहे तो बात अलग है। केंद्र सरकार को ये हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए और अगर ऐसा न हो सके तो कम से कम गंगवा र जैसे मंत्रियो को युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने न दिए जाएं। इतनी उम्मीद तो जनता अपनी चुनी हुई सरकार से कर ही सकती है।

-सचिन पौराणिक

 

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.