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Talented View : श्रीराम की आस क्या खत्म होगा वनवास ? 

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दीपावली करीब है। दीपों के इस पर्व को मनाया इसलिए जाता है कि भगवान राम इसी दिन लंकाविजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे। लेकिन ये देश की विडंबना रही कि भगवान राम की धरती पर हम आज तक उनका मंदिर (Cartoon On Ayodhya) नही बनवा पाए। राम के जन्मस्थान पर प्रभु आज भी तंबू में बैठे है, इसके स्मरण मात्र से मन वेदना से भर जाता है। दुख होता है, गुस्सा भी आता है और दया भी आती है। लेकिन धुंध हटती नही और ये समझ आता नही की आखिर इन परिस्थितियों का जिम्मेदार है कौन?

Talented View :  पढ़े लिखे गंवार

मुस्लिम, ईसाइयों, यहूदियों या फिर बौद्धों के सर्वोच्च धर्मस्थल पर उनके आराध्य पर कोई उंगली उठाये ये संभव ही नही है। लेकिन भारत और हिंदुओं की सहिष्णुता का सबसे बड़ा प्रतीक यही है कि हम अपने आराध्य का मंदिर बनवाने के लिए भी कोर्ट का मुह ताक रहे है। लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि न्याय की घड़ी नज़दीक आ रही है (Cartoon On Ayodhya)। कोर्ट में संभवतः आज या फिर कल इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुन की जाएंगी। इसके बाद किसी भी दिन फैसला आ सकता है। उम्मीद है कि मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने से पूर्व राममंदिर पर फैसला सुना देंगे।
मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ने आज इस केस से हाथ पीछे खींचने की इच्छा जताई है। इसका केस पर क्या असर होता है ये वक्त बतायेगा लेकिन ये तय है कि राममंदिर अब बनकर ही रहने वाला है। 40 दिन तक लगातार सुनवाई के बाद और सालों तक भगवान राम को तंबू में रहने पर मजबूर करने वालों के चेहरे जनता के सामने आने चाहिये। सुनवाई से एन पहले केस वापस लेना कोई सद्भावना से भरा फैसला नही बल्कि पराजय सामने देखकर इज़्ज़त बचाने का एक दांव ज्यादा नज़र आ रहा है। इनमे सच मे ही सद्भावना होती तो ये विदेशी आक्रांता बाबर के एजेंट की तरह काम नही करते।
ये सभी समझ रहे है कि फैसला राममंदिर के पक्ष में ही आने के आसार बन रहे है। लेकिन किन्ही वजहों से अगर फैसला मंदिर के पक्ष में न भी आया तो सरकार को अध्यादेश लाकर मंदिर बनवाना पड़ेगा। क्योंकि जनता की आवाज़ को ज्यादा दिन दबाकर नही रखा जा सकता। केंद्र सरकार राममंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, इसमें कोई शक किसी के मन मे नही होना चाहिये। सरकार की स्पष्ट सोच का ही नतीजा है कि अयोध्या में धारा 144 लगा दी गयी है कानून-व्यवस्था बरकरार रहे।
धारा 370 हटाने के बाद कश्मीर में शांति स्थापित करने वाली सरकार के लिए अयोध्या में राममंदिर बनवाना कोई ज्यादा तकलीफ का विषय नही होगा। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंदिर निर्माण के लिए उत्साहित है और कानून व्यवस्था के बारे में निश्चिंत (Cartoon On Ayodhya)। सरकार अगर मजबूत हो तो कानून-व्यवस्था दुरुस्त रहती ही है। अब मुस्लिम पक्ष को शांति और सद्भाव के साथ कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने के किये तैयार हो जाना चाहिये। राम की राह में अब अगर और रोड़े डाले गए तो बहुसंख्यकों की सद्भावना आप खो देंगे। इसका नुकसान स्थायी होगा।
भगवान राम के भव्य मंदिर की प्रतीक्षा हर सच्चे भारतीय को है। मुस्लिमों को भी अपनी ज़िद छोड़कर रामलला का स्वागत करने को तैयार रहना चाहिए। क्योंकि गंगा-जमनी संस्कृति को सहेजना साझी जिम्मेदारी है। अल्पसंख्यकों को समझना होगा कि बहुसंख्यक आस्था का हर बार मज़ाक नही बनाया जा सकता। उम्मीद है कि अब मंदिर निर्माण का मार्ग शीघ प्रशस्त कर दिया जायेगा और मंदिर निर्माण की खुशखबर जल्दी ही कानों को सुनने को मिलेगी।
        – सचिन पौराणिक
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