Talented View : …तो “अब की बार फिर मोदी सरकार” तय

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आज आम चुनावों के लिए तीसरे राउंड की वोटिंग (Lok Sabha Election 2019 Phase 3 Live) चल रही है। सुबह से पोलिंग बूथों पर मतदाताओं में उत्साह देखा जा रहा है। हर चुनाव की तरह इस बार भी नए मतदाता और ‘फ्लोटिंग वोट’ ही चुनाव की दिशा तय करने वाला होगा। नए मतदाता वो वयस्क युवा होते हैं, जो पहली बार वोट डालने जाएंगे और फ्लोटिंग वोट वह होता है, जो मत किसी पार्टी का निष्ठावान नहीं होता है। हर चुनाव से पहले माहौल देखकर ये फ्लोटिंग वोट एकमुश्त किसी के पाले में गिरता है। इन दोनों को जो दल साध लेता है, उसका चुनाव जीतना आसान हो जाता है।

Talented View : विश्व के सभी देश मिलकर आतंक पर हमला करें

ये फ्लोटिंग वोट और नवमतदाता अपना मूड बहुत छोटी-छोटी बातों से तय करते हैं। मसलन टीवी बहस में पार्टी की मजबूत दलीलें, प्रधानमंत्री उम्मीद्वार की सोशल मीडिया पर छवि और उनके बारे में चल रही खबरें देखकर यह वर्ग बहुत प्रभावित होता है। इस वर्ग के दिमाग से जो खेल लेता है, वह अपनी जीत सुनिश्चित कर लेता है क्योंकि यह वर्ग समझदार भी बहुत होता है। मुफ्त की शराब या मुफ्त की घोषणाओं से इसे कुछ फर्क नहीं पड़ता है । इस वर्ग की तादाद बहुत ज्यादा भले न हो, लेकिन ये हर चुनाव में निर्णायक होते हैं। पार्टियों का ‘कोर वोटर’ अपनी निष्ठा से वोट करता है जबकि यह वर्ग सिर्फ हवा को देखकर अपना रुख तय करता है। कल राहुल गांधी ने अपने ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर न्यायालय मे लिखित हलफनामा देकर खेद जता दिया।

राहुल ने कहा कि चुनाव के जोश में उन्होंने यह सब बोल दिया। उनके खेद जताते ही भाजपा प्रवक्ता उन पर आक्रामक हो गए। इसे राहुल गांधी का ‘यू-टर्न’ दिखाने की कोशिश की गई। यह कोशिश कामयाब भी हुई क्योंकि गलती कांग्रेस के युवराज से हुई थी। इससे उनकी ‘विश्वसनीयता’ पर भी सवालिया निशान लग गए। ऐसे दौर में जब राहुल गांधी की राजनीतिक गंभीरता पर पहले ही प्रश्नचिन्ह लगे हों, तब उनका अपने बयान पर खेद जताना वास्तव में उनकी छवि को धक्का पहुंचाता है। आज चुनाव के लिए सबसे ज्यादा सीटों पर मतदान चल रहा है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का यूं ‘बैकफुट’ पर चले जाना पार्टी के लिए बड़ा धक्का है।

Talented View : जनता के हितों का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी

आज गुजरात की सभी 26 सीटों पर भी मतदान चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी माताजी की वोट डालते तस्वीरें हर चैनल पर दिखाई दे रही हैं। अमित शाह बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं| ऐसे माहौल में ये फ्लोटिंग वोट और नवमतदाता अनायास ही भाजपा की तरफ आकर्षित हो जाता है। कांग्रेस के पास इस वर्ग को अपनी ओर खींचने के लिए कोई योजना नहीं है। एक परिवार के भरोसे बैठना कांग्रेस को महंगा पड़ने वाला है। कल प्रियंका वाड्रा की गुस्सा करने वाली तस्वीरें भी जनता ने देखी। उनके शब्द चाहे जो निकल रहे हों, लेकिन उनकी शारीरिक भाषा यही कह रही थी कि वे बौखलाई हुई हैं।

स्मृति का अमेठी में जूते बांटना वाला प्लान सफल होता दिखाई दे रहा है। ऐसा नहीं होता तो प्रियंका को गुस्सा करने की ज़रूरत ही क्या थी?  सोनिया गांधी का इस चुनाव में सक्रिय न होना भी कांग्रेस के फायदे में नहीं है। स्वास्थ्य कारणों के कारण उनकी सक्रियता में इस बार कमी है। सोनिया गांधी की हिंदी चाहे लाख बुरी थी, लेकिन राजनीति में उनकी एक गंभीर छवि ज़रूर थी। राहुल-प्रियंका में राजनीतिक गंभीरता और परिपक्वता का अत्यधिक अभाव है। राहुल का कोर्ट में जाकर अपनी गलती स्वीकार करना और प्रियंका के यूँ गुस्सा दिखाने से इस निर्णायक वर्ग की कांग्रेस से दूरी बढ़ी है।

Talented View : तो उनकी आवाज़ राजनीति में ‘खामोश’ हो जाएगी

ये छोटी-छोटी गलतियां कांग्रेस के लिए बड़ी तकलीफें लेकर आने वाली हैं। आज शाम के बाद देश की 300 से ज्यादा सीटों पर जनता की राय ईवीएम में बंद हो जाएगी। बचे हुए दौर में मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में मतदान होना है। इन राज्यों में फ्लोटिंग वोट और नवमतदाताओं को भी अगर कांग्रेस यूँ ही निराश करती है तो “अब की बार फिर मोदी सरकार” तय है।

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