राहुल गांधी एक बार फिर ट्रोल

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सार्वजनिक जीवन में ऐसा नेता ढूंढना मुश्किल है, जिसकी कभी ज़ुबान न फिसली हो। हजारों की भीड़ के सामने जोश में आकर या फिर असहज होकर भी कई बार नेता कुछ का कुछ बोल जाते हैं। हिंदी में इसे ज़ुबान फिसलना और अंग्रेजी में ‘स्लिप ऑफ टंग’ कहा जाता है। राजनीतिक क्षेत्र में और विशेषकर चुनाव के मौसम में ऐसी घटनाएं ज्यादा सामने आती हैं क्योंकि तब चुनाव का दबाव सामने होता है। नेताओं की ज़ुबान पहले भी फिसलती थी, लेकिन सोशल मीडिया के इस जमाने में ऐसा होने पर उनकी खूब किरकिरी होती है।

राहुल गांधी कल राजस्थान के झुंझुनूं में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। वहां उन्होंने कुम्भाराम लिफ्ट योजना को कुम्भकर्ण लिफ्ट योजना बता डाला। इसके बाद से ही उनकी और पार्टी की जमकर फजीहत हो रही है। उनके कुम्भकर्ण कहते ही पूरा पंडाल हंसी से गूंज उठा। उसके बाद मंच पर बैठे एक नेता ने तुरन्त उन्हें रोककर सही नाम बताया, जिसके बाद राहुल ने अपनी गलती सुधारी। राहुल गांधी की ज़ुबान फिसलने के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। आलू की फैक्ट्री, बीएचईएल के मोबाइल और पिछत्तीस करोड़ के बाद उनका यह कुम्भकर्ण वाला बयान भी सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। जुबान किसी की भी फिसल सकती है, लेकिन यह भी सही है कि राहुल गांधी की जुबान कुछ ज्यादा ही फिसल जाती है।

इसके अलावा तथ्यात्मक तौर पर भी वे बेहद कमजोर हैं। राफेल की कीमत को लेकर भी हर बार वे नया आंकड़ा बता देते हैं। राहुल गांधी की छवि भी ऐसी ही बन गई है कि आज भी ज्यादातर जनता बिना संदर्भ समझे ऐसा मानती है कि आलू से सोना बनाने वाली मशीन का बयान भी उन्होंने ही दिया था। एक राष्ट्रीय नेता के तौर ऐसी छवि उनकी पार्टी के लिए खतरनाक है। ज़ुबान अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी फिसल जाती है, लेकिन उनकी बात में इतना आत्मविश्वास होता है कि अव्वल तो यह चूक पकड़ में ही नहीं आती। इसके अलावा लोग यह भी सोचते हैं कि मोदीजी ने बोला है तो ठीक ही कहा होगा।

मोदीजी ने भी एक बार बोल दिया था कि उन्हें 600 करोड़ लोगों ने वोट देकर चुना जबकि पूरी दुनिया की तादाद भी इतनी नहीं है। गैस सब्सिडी छोड़ने वालों की संख्या को लेकर भी वे भ्रमित हो चुके हैं। इसके अलावा ऐसे कई मौके आए हैं, जब उनकी ज़ुबान फिसली, लेकिन इन सबके बाद भी निशाने पर राहुल गांधी ही आ जाते हैं। नरेंद्र मोदी की ज़ुबान फिसलने की कहीं चर्चा तक नहीं होती जबकि राहुल गांधी के लिए मानो भाजपा आईटी सेल इंतज़ार ही करती है कि कब जुबान फिसले और कब इस पर चुटकुले बनाए जाएं।

राहुल गांधी की ज़ुबान फिसलने के चंद मिनटों बाद ही वे वीडियो कटिंग जंगल में आग की तरह फैलाई जाती है, उस पर पोस्टर बनाए जाते हैं, चुटकुले बनाकर उन्हें ट्रोल किया जाता है। कांग्रेस की सोशल मीडिया और आईटी टीम यहां बहुत कमजोर साबित होती है। कुम्भकर्ण लिफ्ट योजना वाले बयान के बाद राहुल गांधी एक बार फिर ट्रोल किए जा रहे हैं, लेकिन असली कुम्भकर्ण कांग्रेस की सोशल मीडिया और आईटी सेल है, जो राहुल गांधी का पक्ष रखने और सामने वालों पर वार करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

-सचिन पौराणिक

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